ये उपाय मसूर में लगने वाले रोगों को कर देंगे ढेर, जानें सटीक दवा और बंपर पैदावार की ट्रिक
Last Updated:
Measures cultivation tips : मसूर की खेती किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है, लेकिन कुछ गलतियां किसानों पर भारी पड़ जाती हैं. ऐसे में कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है. जैसे- फसल चक्र अपनाने से मिट्टी में रोगजनकों की संख्या कम होती है. खेत का चुनाव करते समय अच्छी जल निकासी वाली भूमि का चयन और गहरी जुताई कर पिछली फसल के अवशेष मिट्टी में दबा दें. ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक कल्चर का प्रयोग भूमि को रोगमुक्त बनाने में मदद करता है.
बलिया. मसूर की खेती किसानों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है, लेकिन यदि समय रहते रोगों पर ध्यान न दिया जाए, तो पैदावार पर बड़ा असर पड़ सकता है. पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. उकठा, एस्कोकाइटा ब्लाइट और गेरुआ जैसे रोग मसूर की फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. हालांकि, फसल को सही प्रबंधन और सावधानी से बचाव किया जा सकता है. बलिया में मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के HOD प्रो. अशोक कुमार सिंह के मुताबिक, मसूर की फसल का सबसे बड़ा दुश्मन उकठा रोग होता है. इसमें पौधे बढ़ नहीं पाते, रंग पीला या भूरा पड़ने लगता है और धीरे-धीरे पूरा पौधा ही सूख जाता है. यह रोग मिट्टी में मौजूद फफूंद के कारण पनपता है. अधिक नमी और खराब जल निकासी इसकी मुख्य वजह होती है. ऐसे खेतों में मसूर की खेती करने से नुकसान की संभावना ज्यादा होती है.
इन दोनों में क्या
एस्कोकाइटा ब्लाइट रोग में पत्तियों पर छोटे भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो समय के साथ बड़े होकर घाव का रूप ले लेते हैं. इससे पौधे कमजोर होकर मुरझा जाते हैं. यह रोग संक्रमित बीज और पिछली फसल के अवशेषों से फैलते है और ठंडे व नम मौसम में तेजी से बढ़ते है. गेरुआ रोग में पत्तियों और तनों पर नारंगी-भूरे रंग के धब्बे उभर आते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता घट जाती है, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ जाती हैं.
मसूर की खेती में उकठा रोग से बचाव के लिए खेत में नमी बनाए रखनी चाहिए. रोग दिखते ही हाई-स्पेक्ट्रम फफूंदनाशक का छिड़काव करें. फली वेधक कीड़े से बचाव के लिए फूल से फल बनने पर डेल्टा मेथ्रीन 1 मिली प्रति लीटर पानी में छिड़कें. इससे फसल सुरक्षित, शानदार गुणवत्तापूर्ण और बंपर मिलेगी. इन रोगों से बचाव के लिए बीज उपचारित सबसे सुरक्षित उपाय है. बुवाई से पहले प्रति किलो बीज को 2 ग्राम थायरम और 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम से उपचारित करना चाहिए. इसके बाद राइजोबियम और पीएसबी कल्चर से उपचार करें.
सिंचाई का क्या करें
सिंचाई संतुलित रखें और जरूरत के अनुसार ही निराई-गुड़ाई करना चाहिए. रोग-प्रतिरोधी किस्मों का चयन, रोगग्रस्त पौधों को समय पर हटाना और आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कवकनाशी का छिड़काव करने से मसूर की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है. सही तकनीक अपनाकर किसान अच्छी उपज और बेहतर मुनाफा कमाकर मालामाल बन सकते हैं.
About the Author
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें