एक ही डायरेक्टर ने 6 साल में बनाईं 4 कालजयी फिल्में, चारों ने रचा इतिहास, बार-बार देखेंगे, तरसता रहा मन – Rajesh khanna sharmila tagore amar prem aradhana kati patang 4 bollywood films made within 6 years all turn cult classic shakti samanta movies
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Shakti Samanta Superhit Bollywood movies : बॉलीवुड में कुछ सितारे ऐसे भी हुए जो खुद हीरो बनने आए थे. हीरो नहीं बन पाए तो फिल्मकार बनकर दूसरों की किस्मत चमकाने लगे. फिर बॉलीवुड इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक क्लासिक-रोमांटिक-थ्रिलर फिल्में दीं. बंगाल से निकलकर मुंबई पहुंचे एक सितारे की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जो मुंबई हीरो बनने के लिए आए थे, चेहरा-मोहरा भी अच्छा था लेकिन भाग्य में कुछ और लिखा था. हीरो तो नहीं बन पाए लेकिन डायरेक्टर-प्रोड्यूसर बनकर कालजयी फिल्में बना डालीं. ये फिल्मकार कौन थे, इन्होंने कौन सी फिल्में बनाईं, आइये जानते हैं…..

<br />बॉलीवुड में 1950 से 1970 तक बंगाल के संगीत-संस्कृति-कहानियों का प्रभाव देखने को मिलता है. इस दौरान बंगाल में लिखे उपन्यास-कहानियों पर बेस्ड फिल्में बॉलीवुड में बनाई गईं. बंगाल का एक नवयुवक 40 के दशक में मुंबई हीरो बनने के लिए पहुंचा. मुंबई में संघर्ष शुरू हुआ. मुंबई-पुणे के बीच एक छोटे से शहर में टीचर की नौकरी करने लगे लेकिन सपना नहीं छोड़ा. इस युवक का नाम था : शक्ति सामंत. 1948 में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर पहला ब्रेक मिला. वो राजकपूर के साथ ‘सुनहरे दिन’ नाम से एक फिल्म बना रहे थे. शक्ति सामंत ने 1954 की फिल्म ‘बहू’ से बतौर डायरेक्टर अपना करियर शुरू किया. उन्होंने छह साल के अंतराल में ऐसी चार फिल्में बनाईं जिन्होंने इतिहास रच दिया. ये फिल्में थीं : आराधना (1969), कटी पतंग (1971), अमर प्रेम (1972) और अमानुष (1975). आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प तथ्य…..

<br />सबसे पहले बात करते हैं 7 नवंबर 1969 को रिलीज हुई एक ऐसी मूवी की जिसने राजेश खन्ना को रातोंरात स्टार बना दिया. इस फिल्म का डायरेक्शन-प्रोडक्शन शक्ति सामंत ने किया था. नाम था : आराधना. सचिन भौमिक ने 1946 में आई अमेरिकन फिल्म टू ईच हिज ओन (To Each His Own) से इंस्पायर्ड होकर ‘आराधना’ फिल्म की कहानी लिखी थी. यह भी सच है कि उन्होंने सबसे पहले यह कहानी ऋषिकेश मुखर्जी को सुनाई थी लेकिन उन्होंने यह फिल्म नहीं बना पाए. सचिन अपनी कहानी लेकर शक्ति सामंत से मिले. शक्ति सामंत फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए. पहले इस फिल्म का टाइटल ‘सुबह प्यार की’ था जिसे एसडी बर्मन के कहने पर बदलकर ‘आराधना’ कर दिया गया. यह ‘टाइटल’ फिल्मों के पोस्टर डिजाइन करने वाले सी.मोहन ने दिया था.

राजेश खन्ना की फिल्म ‘बहारों के सपने’ में उनके काम से खुश होकर शक्ति सामंत ने उन्हें आराधना के लिए साइन किया था. कहानी-स्क्रीनप्ले सचिन भौमिक-शक्ति सामंत ने लिखा था. आराधना की शुरुआती कहानी अनिल कपूर के पिता सुरेंद्र कपूर की फिल्म ‘एक श्रीमान एक श्रीमती’ से बिल्कुल मिलती-जुलती थी. दोनों के राइटर सचिन भौमिक ही थे. एक समय ऐसा भी आया जब शक्ति सामंत ने ‘आराधना’ फिल्म को बनाने का आइडिया ड्रॉप कर दिया. इसी बीच उनकी मुलाकात गुलशन नंदा से हुई तो उन्होंने ‘आराधना’ में हीरो का डबल रोल करने का सुझाव दिया. इस सुझाव को मानकर मूवी बनाई गई. क्लाइमैक्स में कई बदलाव किए गए. आराधना ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया.
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आराधना फिल्म में राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर, सुजीत कुमार, फरीदा जलाल और अशोक कुमार नजर आए थे. म्यूजिक एसडी बर्मन का था. फिल्म में 31:55<br />मिनट की लेंग्थ के कुल 7 गाने रखे गए. ये गाने अमर हो गए. गीतकार आनंद बख्शी थे. किशोर कुमार भी रातोंरात स्टार बन गए. यह पहला मौका था जब उन्होंने राजेश खन्ना को अपनी आवाज दी थी. सबको ऐसा लगा कि जैसे राजेश खन्ना ही पर्दे पर गा रहे हैं. फिर तो राजेश खन्ना-किशोर कुमार दो जिस्म एक जा हो गए. किशोर दा को मनाने के लिए राजेश खन्ना उनके घर गए थे. उन्होंने कुछ सवाल भी पूछे थे जिसका जवाब सुनकर खुश हो गए थे. आराधना फिल्म को तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले थे. बेस्ट डायरेक्टर शक्ति सामंत, बेस्ट एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड किशोर कुमार को ‘रूप तेरा मस्ताना’ के लिए मिला था. यह फिल्म हिंदी सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई.

आराधना से शक्ति सामंत की पहचान रोमांटिक फिल्मकार के रूप में भी स्थापित हुई. आराधना के बाद उनकी अगली फिल्म 1971 में ‘कटी पतंग’ रिलीज हुई. कटी पतंग में राजेश खन्ना, आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा, बिंदु, नासिर हुसैन नजर आए थे. कटी पतंग और आराधना की कहानी एक ही रात में फाइनल हुई थी. गुलशन नंदा ने कटी पतंग की कहानी शक्ति सामंत को सुनाई थी. इसी दौरान ही उन्होंने ‘आराधना’ में हीरो का डबल रोल रखने का सुझाव दिया था. इस तरह से एक ही रात में ‘आराधना’ और ‘कटी पतंग’ का जन्म हुआ. आराधना 7 नवंबर 1969 को रिलीज हुई थी जबकि 29 जनवरी 1971 को सिनेमाघरों में आई थी.

<br />’कटी पतंग’ ने राजेश खन्ना के स्टारडम को अर्श पर पहुंचा दिया. स्टोरी-स्क्रीनप्ले गुलशन नंदा का था. डायलॉग वृजेंद्र गौर ने लिखे थे. फिल्म की कहानी 1948 में आए कॉर्निल वूलरिच के उपन्यास ‘आई मैरिड ए डेड मैन’ से इंस्पायर्ड होकर लिखी गई थी. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. इस फिल्म के सुपरहिट गानों में ‘प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है’, ‘ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जा’, ‘ये जो मुहब्बत है, उनका है काम’ ‘ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है’ शामिल हैं. गीतकार आनंद बख्शी थे. डायरेक्टर और प्रोड्यूसर शक्ति सामंत ही थी. देखा जाए तो आराधना-कटी पतंग में शक्ति सामंत, किशोर कुमार-आनंद बख्शी की तिकड़ी थी. कटी पतंग से प्रेम चोपड़ा और बिंदु को बहुत फायदा हुआ. दोनों को कई फिल्में मिलीं. आशा पारेख को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था. कटी पतंग 1971 की पांचवी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

आराधना और कटी पतंग की अपार सफलता के बाद शक्ति सामंत ने एक और फिल्म बनाई. 1972 में आई इस फिल्म का नाम अमर प्रेम था. शक्ति सामंत निर्माता-निर्देशक थे. कहानी विभूति भूषण बंधोपाध्याय ने, स्क्रीनप्ले अरविंद मुखर्जी ने लिखा था. डायलॉग रमेश पंत ने लिखे थे. यह फिल्म 1970 में आई बंगाली मूवी ‘निशि पदमा’ से इंस्पायर्ड थी. शक्ति सामंत ने फिल्म के राइट्स खरीदकर इसे हिंदी में बनाया और आनंद बाबू के रोल को अमर कर दिया. पहले उनके किरदार का नाम उत्तर कुमार था जिसे राजेश खन्ना ने बदलकर आनंद बाबू कर लिया था.

बंगाली राइटर अरविंद मुखर्जी को हिंदी नहीं आती थी. उन्होंने अमर प्रेम की स्क्रिप्ट अंग्रेजी में लिखी थी. हिंदी में अनुवाद रमेश पंत ने किया था. ‘आई हेट टियर्स पुष्पा’ को ज्यों का रहने दिया. 1971 में फिल्म की रिलीज से पहले एक स्पेशल शो दिल्ली में रखा गया था लेकिन अगले ही भारत-पाक युद्ध शुरू हो गया. यह फिल्म जनवरी 1972 में रिलीज की गई. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. फिल्म के गाने, म्यूजिक, डायलॉग हमेशा के लिए अमर हो गए.

1975 में शक्ति सामंत की एक और फिल्म ‘अमानुष’ आई थी जो हिंदी सिनेमा की आइकॉनिक फिल्मों में से एक है. यह फिल्म 21 मार्च 1975 को हिंदी में रिलीज हुई थी. फिल्म में शर्मिला टैगोर-उत्तर कुमार, उत्पल दत्त, असित सेन और अनिल चटर्जी लीड रोल में थे. फिल्म बंगाली और हिंदी दोनों में एक साथ शूट की गई. फिल्म का डायरेक्शन-प्रोडक्शन शक्ति सामंत ने ‘शक्ति फिल्म्स’ के बैनर तले किया था. फिल्म शक्तिपडा राजगुरु की कहानी नया बासत पर बेस्ड थी. म्यूजिक श्यामल मित्रा का था. फिल्म में 23:27 मिनट की लेंग्थ के कुल 6 गाने थे. इसमें से ‘दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा…अमानुष बनाकर छोड़ा’ आज भी टूटे दिल आशिकों की पहली पसंद है. गीतकार इंदीवर थे. बंगाली वर्जन ने 1.8 करोड़ का कलेक्शन किया था. हिंदी वर्जन में यह फिल्म सिल्वर जुबली निकली थी. इंदीवर को बेस्ट लिरिसिस्ट का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. किशोर कुमार को भी बेस्ट सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.