bathroom mirror vastu। बाथरूम में शीशा वास्तु
Bathroom Mirror Vastu: आज के समय में हर घर में बाथरूम सिर्फ नहाने या तैयार होने की जगह नहीं, बल्कि रिलैक्स करने का एक छोटा सा स्पेस बन चुका है. मॉडर्न इंटीरियर के साथ लोग इसमें अच्छे टाइल्स, लाइट्स, होल्डर और स्टाइलिश शीशा भी लगवाते हैं, ताकि पूरा माहौल क्लासी दिखे. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बाथरूम में लगा शीशा आपके जीवन में बदलाव ला सकता है? कई लोग इस बात को इग्नोर कर देते हैं कि घर के हर कोने का एक एनर्जी सर्कल होता है. खासकर बाथरूम, जहां पानी की वजह से ज्यादा एनर्जी मूवमेंट रहता है, वहां कुछ चीजों की सेटिंग अगर गलत हो जाए तो असर सीधे लाइफस्टाइल, मूड, फाइनेंस और रिलेशन तक पर महसूस हो सकता है. वास्तु के मुताबिक, बाथरूम में शीशा लगाना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन इसके लिए कुछ खास नियम और डायरेक्शन का ध्यान रखना जरूरी है. शीशे का फेस किस तरफ हो, उसका साइज क्या हो, गेट के सामने हो या नहीं, टूटा-फूटा हो या साफ-सुथरा, ये सब चीजें मिलकर एनर्जी पर प्रभाव डालती हैं. अक्सर लोग जल्दी में सिर्फ डिजाइन देखकर शीशा लगा देते हैं, जबकि असली बात उसकी प्लेसमेंट में छुपी होती है. इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि बाथरूम में शीशा लगाना सही है या गलत और कौन सी बातें ध्यान में रखकर आप पॉजिटिव एनर्जी को अपनी लाइफ में बनाए रख सकते हैं. ये जानकारी उन लोगों के लिए बहुत मददगार हो सकती है जो अपने घर की एनर्जी को बैलेंस में रखना चाहते हैं और लाइफ में बिना वजह की परेशानियों से बचना चाहते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.
बाथरूम में शीशा लगाना सही या गलत?
वास्तु एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाथरूम में शीशा लगाया जा सकता है, लेकिन बिना सोचे-समझे नहीं. मतलब गलत दिशा में या गलत साइज का शीशा रख दिया तो इसका असर घर के माहौल पर नकारात्मक महसूस हो सकता है. वहीं सही दिशा और सही तरह का शीशा लगाने से बाथरूम का एनर्जी फ्लो बैलेंस रहता है और माहौल हल्का और पॉजिटिव महसूस होता है.
शीशे की दिशा का ध्यान रखें
-बाथरूम में शीशा गेट के ठीक सामने नहीं लगाना चाहिए.
जैसे ही कोई अंदर आए और उसकी नजर सीधे शीशे पर पड़े, ये एनर्जी मुवमेंट को असंतुलित करता है. इसका असर घर में तनाव, टकराव या मानसिक थकान के रूप में दिख सकता है.
-कोशिश करें कि शीशा उत्तर या पूर्व दिशा वाली दीवार पर लगे. ये दोनों दिशाएं एनर्जी के प्रवाह को बैलेंस में रखती हैं और पॉजिटिव वाइब्स बढ़ाती हैं.
-अगर जगह कम है तो गेट से थोड़ी दूरी बनाकर ही लगाएं, ताकि एंट्री पर नजर सीधे शीशे में न पड़े.
शीशे का डिजाइन और आकार
-वास्तु में आयताकार या चौकोरशीशे को बेहतर माना गया है. ये आकार बैलेंस और स्टेबिलिटी को दर्शाते हैं, इसलिए एनर्जी भी स्थिर रहती है.
-गोल, अजीब कट वाले, या डिजाइनर कटिंग में बने शीशों को बाथरूम में लगाने से बचें. ये एनर्जी फ्लो को भटका सकते हैं.
-शीशा ऐसा हो कि आपकी पूरी छवि साफ दिखे. कट या आधा प्रतिबिंब वाले शीशे से मानसिक भ्रम या बेचैनी की फीलिंग बढ़ सकती है.
टूटा या गंदा शीशा बन सकता है समस्या
-बाथरूम का शीशा हमेशा साफ, क्रिस्टल क्लियर और बिना दाग केहोना चाहिए.
-धुंधला, स्क्रैच वाला या दाग भरा शीशा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है.
-टूटा या दरार वाला शीशा किसी भी हालत में नहीं रखना चाहिए, इससे घर में बेचैनी, उलझन और नेगेटिव माहौल बढ़ता है. मत सोचिए कि “चलो काम चल रहा है”, ये छोटी चीज बड़ी परेशानियों की वजह बन सकती है.
कब शीशा न लगाएं
-अगर बाथरूम बहुत छोटा है और गेट खोलते ही दीवार सामने है, तो वहां शीशा लगाने से परहेज करें.
-जहां लगातार पानी की छींटे पड़ती हों वहां शीशा न लगाएं, इससे गंदगी और दाग जल्दी जमा होते हैं.
-अगर घर में पहले से परेशानियां चल रही हों तो बिना एक्सपर्ट सलाह शीशे को शिफ्ट न करें. गलत बदलाव से टेंशन और बढ़ सकती है.
एक्सपर्ट सलाह क्यों जरूरी है
हर घर का नक्शा, दिशा और स्ट्रक्चर अलग होता है. इसलिए अगर आप कंफ्यूज हैं या किसी बात का यकीन नहीं है, तो किसी अनुभवी वास्तु एक्सपर्ट से एक बार राय जरूर ले लें. गलतफहमी में किए गए बदलाव कभी-कभी फायदे की जगह नुकसान कर देते हैं.