क्या सच में अब यूपी के सरकारी टीचर करेंगे कुत्तों की गणना? जानें क्या बोले चित्रकूट के शिक्षक
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Chitrakoot News: उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को अब आवारा कुत्तों की गिनती करने का आदेश दिया गया है. इसका उद्देश्य बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. अध्यापक कहते हैं कि यह अतिरिक्त जिम्मेदारी पढ़ाई पर असर डाल सकती है, लेकिन आदेश का पालन करना अनिवार्य होगा.
उत्तर प्रदेश में सरकारी अध्यापकों के लिए एसआईआर का काम पूरा होते ही एक ऐसा नया आदेश सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर आम लोगों तक को चौंका दिया है. यह आदेश न तो पाठ्यक्रम से जुड़ा है, न परीक्षा से और न ही बच्चों की पढ़ाई से, यह आदेश स्कूल की चारदीवारी से बाहर घूम रहे आवारा कुत्तों से जुड़ा है.जिसको सुनने और पढ़ने के बाद हर कोई चर्चा कर रहा है.
यूपी में अनोखा आदेश
बतादें कि यूपी में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और दहशत को देखते हुए प्रशासन ने एक अनोखा कदम उठाया है. आदेश के मुताबिक सरकारी स्कूलों के अध्यापक अब अपने नियमित कार्यों के साथ-साथ अपने क्षेत्र में घूम रहे आवारा कुत्तों की गणना करेंगे. ताकि इलाके में कुत्तों की सही संख्या का आंकड़ा जुटाया जाए और उनके नियंत्रण की ठोस योजना बनाई जा सके और स्कूली बच्चों के साथ-साथ आम लोगों को सुरक्षित रखा जा सके. यूपी में यह आदेश सामने आते ही चर्चा का विषय बन गया है. सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक लोग इसी पर बहस करते नजर आ रहे है.
अध्यापकों ने बताई ये सच्चाई
इन्हीं सवालों की हकीकत जानने के लिए चित्रकूट में लोकल 18 की टीम कई सरकारी स्कूलों तक पहुंची, जहां मौजूद अध्यापकों की राय भी कम दिलचस्प नहीं रही है. कुछ अध्यापकों ने साफ कहा कि वे सरकारी कर्मचारी हैं और ऊपर से जो भी आदेश आएगा, उसका पालन करना उनकी मजबूरी है. हम लोग एक नौकरी कर रहे हैं, जैसा आदेश आएगा, वैसा करना पड़ेगा, चाहे वह पढ़ाने का हो या गिनती करने का हो. चित्रकूट के शिक्षकों ने जिले के आदेश को लेकर कहा कि फिलहाल उन्हें कुत्तों की गिनती का कोई लिखित आदेश नहीं मिला है,लेकिन यह जरूर कहा गया है कि यदि किसी स्कूली बच्चे को कुत्ता काट लेता है, तो संबंधित अध्यापक की जिम्मेदारी होगी कि वह बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाए और इलाज कराए.और कुत्तों को स्कूल के अंदर आने से रोकेंगे.
अध्यापक बोले आदेश का करेंगे पालन
वहीं स्कूल में मौजूद कुछ अध्यापकों का कहना है कि ऐसे कामों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी,हम पहले ही पढ़ाई के अलावा कई शैक्षणिक काम कर रहे हैं.अब अगर कुत्तों की गिनती भी करनी पड़ी तो पढ़ाने का समय कहां बचेगा हालांकि उनका यह भी कहना है कि आदेश अगर आ गया तो करना ही पड़ेगा.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें