Vastu defects and health। घर की गलत दिशा के नुकसान

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Dimag Se Judi Vastu Tips : आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अपने घर और कार्यस्थल को केवल रहने या काम करने की जगह मान लेते हैं, जबकि वास्तु शास्त्र इसे ऊर्जा का केंद्र मानता है. वास्तु के अनुसार, हमारे आसपास की सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा सीधे शरीर और दिमाग पर असर डालती है. जब यह ऊर्जा संतुलन में रहती है, तो व्यक्ति सामान्य रूप से स्वस्थ रहता है. मगर जब लंबे समय तक घर में भारी वास्तु दोष बने रहते हैं, तो उनका प्रभाव धीरे-धीरे स्वास्थ्य पर दिखने लगता है. कई मामलों में मानसिक तनाव, न्यूरोलॉजिकल समस्या, अचानक बेहोशी, पैरालिसिस या कोमा जैसी स्थिति भी सामने आ सकती है. वास्तु यह नहीं कहता कि हर बीमारी का कारण केवल घर होता है, लेकिन यह जरूर मानता है कि गलत दिशा, भारी दबाव और ऊर्जा का अवरोध शरीर की प्राकृतिक शक्ति को कमजोर कर सकता है. खासकर मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्याओं में घर का उत्तर-पूर्व भाग और मध्य हिस्सा बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. जब इन जगहों पर भारी निर्माण, गंदगी या कटाव होता है, तो व्यक्ति की सोचने, समझने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित होती है. इस आर्टिकल में हम वास्तु के उसी नजरिये को आसान भाषा में समझेंगे, जिससे पढ़ने वाला बिना किसी उलझन के बात को समझ सके. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.

1. ईशान कोण का भारी दोष
वास्तु में ईशान कोण को दिमाग से जोड़ा जाता है. इस दिशा में यदि सीढ़ियां, भारी मशीन, भारी स्टोर या ऊंची दीवार हो, तो ऊर्जा का बहाव रुक जाता है. अगर यहां शौचालय बना हो या लगातार गंदगी रहती हो, तो नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. इसका असर सीधे मानसिक संतुलन और नर्व सिस्टम पर पड़ता है. कई बार यह स्थिति लंबे इलाज के बाद भी सुधार नहीं दिखने देती.

2. ब्रह्मस्थान पर दबाव
घर का बीच वाला हिस्सा ब्रह्मस्थान कहलाता है. इसे शरीर की नाभि की तरह माना जाता है, जहां से ऊर्जा पूरे घर में फैलती है. अगर इस जगह पर भारी खंभा, सीढ़ियां, गड्ढा या शौचालय हो, तो ऊर्जा का प्रवाह टूट जाता है. इससे व्यक्ति की जीवनी शक्ति घटती है और शरीर रिकवरी नहीं कर पाता. गंभीर स्थिति में यह कोमा जैसी अवस्था को बढ़ावा दे सकता है.

3. नैऋत्य कोण में असंतुलन
दक्षिण-पश्चिम दिशा स्थिरता से जुड़ी होती है. यदि यह हिस्सा बहुत नीचा हो या यहां बोरवेल, गड्ढा या खालीपन ज्यादा हो, तो बीमारी लंबी चलती है. मरीज जल्दी ठीक नहीं हो पाता और मानसिक मजबूती भी कमजोर होती जाती है.

4. सोते समय सिर की दिशा
लंबे समय तक उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से पृथ्वी के चुंबकीय प्रभाव के कारण दिमाग की सूक्ष्म नसों पर दबाव पड़ता है. यह स्थिति धीरे-धीरे पैरालिसिस या गहरी बेहोशी जैसी समस्या की वजह बन सकती है.

5. अग्नि तत्व का असंतुलन
आग्नेय कोण में पानी का स्रोत होना ऊर्जा और इच्छाशक्ति को कम करता है. इससे शरीर थकान, कमजोरी और मानसिक सुन्नता की ओर बढ़ सकता है.

महत्वपूर्ण बात
वास्तु दोष एक सहायक कारण हो सकता है, लेकिन किसी भी गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह और मेडिकल इलाज सबसे पहले जरूरी है.

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