हरे मटर की देसी तिवरा भाजी! गांवों की खास सब्जी, ठंड में भी रखें सेहत और स्वाद का ध्यान – Chhattisgarh News
Tivra Bhaji Recipe: सर्दियों के मौसम में छत्तीसगढ़ के गांवों की रसोई में देसी खुशबू और स्वाद अपने चरम पर होता है. इसी मौसम में खेतों से ताजा निकलने वाली तिवरा भाजी और हरा मटर न सिर्फ किसानों की आमदनी का जरिया बनते हैं, बल्कि लोगों की थाली की शान भी बढ़ाते हैं. गांवों में खास तौर पर ठंड के दिनों में बनाई जाने वाली तिवरा भाजी और हरा मटर की सब्जी स्वाद के साथ-साथ पौष्टिकता से भरपूर होती है. स्थानीय बाजारों में इन सब्जियों की खूब मांग रहती है और लोग इसे रोटी, गरम चावल या बोरेबासी के साथ बड़े चाव से खाते हैं. बिलासपुर की अन्नू खरे ने इस पारंपरिक छत्तीसगढ़िया रेसिपी को साझा किया है.
खेतों से बाजार तक भारी डिमांड
छत्तीसगढ़ के किसान सर्दियों के मौसम में अपने खेतों में तिवरा भाजी और हरा मटर की खेती करते हैं. यह सब्जियां ठंड में ही अच्छी पैदावार देती हैं, जिससे गांवों से लेकर शहरों के बाजारों तक इनकी भरपूर आवक होती है.
तिवरा भाजी और मटर की सफाई
सबसे पहले तिवरा भाजी को अच्छी तरह पानी से धोकर साफ किया जाता है और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है. वहीं, हरे मटर को छीलकर उसके दाने अलग कर लिए जाते हैं.
पकाने की खास रेसिपी
एक कढ़ाई में पानी गर्म कर कटी हुई तिवरा भाजी डाली जाती है और ढककर नरम होने तक पकाया जाता है. इसके बाद मटर और स्वादानुसार नमक डालकर 5 से 7 मिनट तक पकाया जाता है. सब्जी पकने पर इसमें कटे हुए टमाटर डालकर फिर से ढक दिया जाता है, जिससे सब्जी का स्वाद और रंग निखर जाता है.
तड़के का तड़का स्वाद कर देगा दोगुना
सब्जी पक जाने के बाद उसे अलग बर्तन में निकाल लिया जाता है. उसी कढ़ाई में तेल गर्म कर लहसुन और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है. लहसुन के सुनहरे होते ही तैयार सब्जी को तड़के के ऊपर पलट दिया जाता है और कुछ देर ढककर रखा जाता है.
भात, बोरेबासी के साथ परोसे
तैयार होती है गरमा-गरम, स्वादिष्ट और पौष्टिक तिवरा भाजी–हरा मटर की सब्जी. छत्तीसगढ़ में लोग इसे रोटी, गरम चावल या पारंपरिक बोरेबासी के साथ बड़े शौक से खाते हैं.
स्थानीय स्वाद की पहचान
बिलासपुर की अन्नू खरे बताती हैं कि यह रेसिपी सादगी, सेहत और स्वाद का अनोखा मेल है, जो छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खानपान संस्कृति को जीवंत रखती है.