Noida AQI Today: स्मॉग से मिली छुट्टी! तेज हवाओं ने सुधारी नोएडा की एयर क्वालिटी, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
Noida AQI Today News: तेज हवाओं ने NCR की जहरीली हवा को कुछ हद तक राहत दी है. जी हां…लंबे समय से स्मॉग और प्रदूषण की मार झेल रहे नोएडा और गाजियाबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में सुधार दर्ज किया गया है. कई इलाकों की हवा ऑरेंज जोन में पहुंच गई, जिससे न सिर्फ दृश्यता बेहतर हुई बल्कि लोगों को सांस लेने में भी राहत मिली. इतना ही नहीं, AQI के ऑरेंज जोन में जाने के बाद ग्रैप-4 की सख्त पाबंदियां हटा दी गईं है.
हवा की रफ्तार बढ़ी, AQI में दिखा असर
तेज हवाओं के कारण प्रदूषक कणों का फैलाव हुआ, जिससे स्मॉग की परत पतली हुई और दृश्यता में सुधार आया. 25 दिसंबर यानी क्रिसमस की सुबह लोगों को घनी धुंध का सामना नहीं करना पड़ा, जिससे आम जनजीवन सामान्य रहा. मौसम विभाग के अनुसार 25 दिसंबर को अधिकतम तापमान लगभग 22 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं, आईएमडी ने 26 और 27 दिसंबर को तापमान 20 से 6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की आशंका जताई है.
आने वाले दिनों में फिर बढ़ सकती है धुंध
मौसम विभाग ने 26 और 27 दिसंबर को सुबह और दोपहर के समय डेंस फॉग की संभावना जताई है. 27 दिसंबर को आर्द्रता 75 से 100 प्रतिशत तक रह सकती है, जिससे प्रदूषण के दोबारा बढ़ने की आशंका बनी हुई है.
नोएडा के इलाकों में AQI और PM2.5 का हाल
| सेक्टर | AQI | PM2.5 | PM10 |
| सेक्टर-125 | 225 | 115 | 145 |
| सेक्टर-62 | 216 | 156 | 209 |
| सेक्टर-1 | 252 | 123 | 183 |
| सेक्टर-116 | 232 | 157 | 202 |
| सेक्टर-92 | 216 | 141 | 169 |
| नॉलेज पार्क-III | 202 | 127 | 146 |
गाजियाबाद के इलाकों में भी राहत
इंदिरापुरम: AQI 212
लोनी: AQI 262
संजय नगर: AQI 243
वसुंधरा: AQI 265
इन सभी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता ऑरेंज जोन में दर्ज की गई है.
ग्रैप-4 की पाबंदियां हटीं, लोगों को मिली राहत
हवा की गुणवत्ता में सुधार के चलते GRAP-4 की सख्त पाबंदियां हटा ली गई हैं. इसके बाद निर्माण कार्य, औद्योगिक गतिविधियों और अन्य जरूरी कामों में लोगों को राहत मिली है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार अस्थायी हो सकता है. यदि हवा की गति कम हुई और कोहरा बढ़ा तो प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ सकता है. लोगों को सतर्क रहने, मास्क का उपयोग करने और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है.
PM 2.5 और PM 10 क्यों हैं खतरनाक?
हवा में दिखने वाली धूल से ज्यादा खतरनाक होते हैं PM 2.5 और PM 10. PM का मतलब पार्टिकुलेट मैटर होता है, जो बेहद सूक्ष्म कण होते हैं और आंखों से दिखाई नहीं देते. ये कण शरीर की प्राकृतिक फिल्ट्रेशन प्रक्रिया से बचकर सीधे फेफड़ों और खून में प्रवेश कर सकते हैं. इनसे फेफड़ों को नुकसान, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, दिल की बीमारियां और श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक संपर्क रहने पर यह स्थिति क्रोनिक बीमारी का रूप भी ले सकती है.