सिर्फ दो बोल्ट पर टिका है कानपुर का ऐतिहासिक LLJM चर्च, यहां आपको दिखेगा आस्था, इतिहास और इंजीनियरिंग अनूठा संगम
कानपुर: कानपुर के सिविल लाइन्स इलाके में स्थित L.L.J.M. Methodist Church न सिर्फ ईसाई समुदाय की आस्था का बड़ा केंद्र है, बल्कि यह चर्च अपने अनोखे निर्माण और इतिहास के कारण भी खास पहचान रखती है. चर्च के फादर जे.जे. ओलिवर के अनुसार यह चर्च अंग्रेजों के शासनकाल में बनवाई गई थी और आज भी उसी मजबूती के साथ खड़ी है.
कब और क्यों बनी
चर्च के फादर जे.जे. ओलिवर बताते हैं कि इस चर्च का निर्माण करीब 1914 के आसपास अंग्रेजों के समय में कराया गया था. उस दौर में कानपुर तेजी से औद्योगिक शहर बन रहा था और यहां बड़ी संख्या में अंग्रेज अफसर और उनके परिवार रहते थे. उनकी धार्मिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस चर्च की नींव रखी गई.
चर्च का नाम Lezee Laura Johnson Memorial Methodist Church (LLJM) रखा गया, जो उस समय के मिशनरी कार्यों से जुड़ा हुआ है. यह चर्च लगभग एक सदी से भी ज्यादा समय से लगातार प्रार्थनाओं और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है.
कहां स्थित है और क्या है खास
यह चर्च सिविल लाइन्स, पोस्ट ऑफिस लेन में स्थित है. आसपास का इलाका भी अंग्रेजों के समय की बसावट को दर्शाता है. चर्च की सबसे खास बात इसकी ब्रिटिश शैली की वास्तुकला है. मोटी ईंटों की दीवारें, ऊंची छत, बड़े-बड़े खिड़की और दरवाजे इसे खास बनाते हैं. अंदर प्राकृतिक रोशनी और हवा का अच्छा प्रवाह रहता है, जिससे दिन में बिजली की जरूरत बहुत कम पड़ती है.
दो बोल्ट पर टिका अनोखा मैकेनिज्मइस
चर्च को सबसे अलग बनाता है इसका दो बोल्ट वाला मैकेनिज्म. फादर जे.जे. ओलिवर के मुताबिक, पूरे ढांचे का संतुलन दो खास लोहे के बोल्टों पर आधारित है. ये बोल्ट इमारत के मुख्य हिस्सों को आपस में जोड़कर रखते हैं.
फादर का कहना है कि अगर इन दोनों बोल्टों को खोल दिया जाए, तो चर्च का संतुलन बिगड़ सकता है और पूरा ढांचा ढहने की स्थिति में आ सकता है. यह तकनीक अंग्रेज इंजीनियरों ने इमारत को लंबे समय तक सुरक्षित और संतुलित रखने के लिए अपनाई थी. यही वजह है कि इतने साल बीतने के बाद भी चर्च आज मजबूत हालत में है.
क्रिसमस पर क्या होता है खास
क्रिसमस के मौके पर इस चर्च में खास रौनक देखने को मिलती है.चर्च को रोशनी, फूलों और क्रिसमस ट्री से सजाया जाता है. 24 दिसंबर की रात विशेष प्रार्थना सभा और कैंडल लाइट सर्विस आयोजित होती है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं.
25 दिसंबर को सुबह विशेष प्रार्थना, भजन और कैरल सिंगिंग होती है. दूर-दराज से भी लोग इस ऐतिहासिक चर्च में क्रिसमस मनाने पहुंचते हैं. बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम और सामूहिक प्रार्थनाएं भी आयोजित की जाती हैं.
आस्था, इतिहास और इंजीनियरिंग का संगम
करीब सौ साल से ज्यादा पुरानी यह चर्च आज भी आस्था, इतिहास और इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरण है. दो बोल्ट पर टिकी होने की कहानी इसे और भी रहस्यमयी बनाती है. फादर जे.जे. ओलिवर के अनुसार, यह चर्च आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश देती है कि पुराने समय में भी सोच-समझकर ऐसी इमारतें बनाई जाती थीं, जो आज भी लोगों को हैरान करती हैं.