कब्ज से लेकर गठिया तक, चमत्कारी है नील का पौधा, हर हिस्सा कीमती, जानें उपयोग का तरीका – Uttar Pradesh News
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Neel ka paudhe ke fayde : नील का पौधा सिर्फ रंग बनाने के लिए ही नहीं, हमारी सेहत के लिए भी रामबाण है. इसमें बहुत सारे पोषक तत्त्व होते हैं. इसके इस्तेमाल से शरीर को कई रोगों से दूर रखा जा सकता है. इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, इंडिरुबिन (एंटीऑक्सीडेंट) और फ्लेवोनोइड्स पाया जाता है. नीली की जड़ को चबाकर मुंह में रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं. जड़, तना और पत्ते को पीसकर लेप बनाकर मस्तक पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है.

प्रकृति ने हमें अनगिनत औषधीय वनस्पतियों का अमूल्य खजाना दिया है. इनमें घास-फूस से लेकर फल-फूल और पेड़-पौधे शामिल हैं, जिनका उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के रूप में भी किया जाता रहा है. इन्हीं में से एक है नील का पौधा. नील का पौधा सिर्फ रंग बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है.

जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) लोकल 18 से बताते हैं कि नील एक औषधीय पौधा है. इसके फूल, पत्ते, बीज और जड़ स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हैं. इसमें भरपूर मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस (P) और पोटैशियम (K) इंडिरुबिन (एंटीऑक्सीडेंट) और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाएं जाते हैं, जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं.

बच्चों के दांत में कीड़े लगने की बीमारी सबसे आम होती है. इससे राहत दिलाने में नील का औषधीय गुण बहुत उपयोगी है. नील की जड़ को चबाकर मुख में रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं.
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तनाव से अगर आपको हर दिन सिरदर्द होता है तो नील की जड़, तना और पत्ते को पीसकर लेप बना लें. फिर उसे मस्तक पर लगाने से सिरदर्द मे आराम मिलता है.

नील के पौधे की जड़, पत्ते और तने का चूर्ण 1-2 ग्राम सेवन करने से कफ दूर होता है. सांस फूलने और फेफड़ों में सूजन, लंग्स नलिका में सूजन या काली खांसी जैसे रोगों में लाभ होता है.

कई लोग कब्ज से परेशान रहते हैं. ऐसा में 1-2 ग्राम नील के पौधे का फल और जड़ का चूर्ण बना लें. इसे हर दिन सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से कब्ज और लीवर के सूजन को कम करने में मदद मिलती है.