बिहार पॉलिटिक्स में एंट्री और एग्जिट प्लान पर नीतीश की नजर! क्या दिल्ली में तय हो गया अगला अध्याय?
पटना. बीते 22 दिसंबर को दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह दौरा समय और सियासी संदर्भ-दोनों लिहाज से खास माना जा रहा है. चुनावी जीत के एक महीने बाद यह पहला मौका था जब एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के साथ बिहार के भविष्य पर विस्तार से चर्चा हुई. सूत्रों के मुताबिक बातचीत का एजेंडा बिहार के लिए स्पेशल पैकेज, कैबिनेट विस्तार और राज्यसभा की पांच सीटों तक सीमित नहीं था, अंदरखाने चर्चा नीतीश कुमार के बाद के राजनीतिक रोडमैप और संभावित उत्तराधिकारी को लेकर भी हुई. बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हालिया दिल्ली दौरे के दो दिन बाद भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
दिल्ली में नीतीश की ‘कर्टसी कॉल’ या…
दौरे की पृष्ठभूमि और समय पर सवाल
22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बातचीत करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, साथ में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी.
बनने लगा बिहार की सत्ता का फ्यूचर प्लान?
दरअसल, जब भी कोई बड़े राजनीतिज्ञों की मुलाकातें होती हैं तो यह सामान्य तो बिल्कुल ही नहीं होता और यह दौरा भी ‘रणनीतिक’ कहा जा रहा है. नीतीश कुमार 74 वर्ष के हैं. स्वास्थ्य मुद्दों और अपनी उम्र के कारण उत्तराधिकारी की तलाश में लगे दिखते हैं. लेकिन, एक बात जो गौर करने वाली यह रही कि नीतीश कुमार ने मीडिया से बात नहीं की और बचकर निकल गए. यह इसलिए चौंकाता है, क्योंकि यह व्यवहार उनके पुराने स्टाइल से अलग है. जानकार कहते हैं कि संभव है कि हाल के दिनों में नीतीश कुमार कई बार कुछ ऐसा कर जाते हैं कि मीडिया की सुर्खियां बन जाते हैं. ऐसे में मीडिया से दूरी बनना भी एक रणनीति के तौर पर हो सकता है. खैर इस दौरे की मूल बात सूत्रों के हवाले से यह निकलकर आई है कि विकास पैकेज, कैबिनेट विस्तार और राज्यसभा सीटों के अतिरिक्त नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री और खुद नीतीश की संभावित एग्जिट पर गहन चर्चा की गई है.
नीतीश के दिल्ली दौरे ने बढ़ाई सियासी धड़कन
मुलाकात में ‘सात निश्चय’ योजना को पूरा करने के लिए केंद्र से फंड की मांग प्रमुख थी. नीतीश ने बिहार के विकास के लिए स्पेशल पैकेज मांगा और मोदी ने कथित तौर पर आश्वासन दिया कि कोई कमी नहीं होगी. ”बिहार को फंड की जरूरत है”, पर पीएम मोदी ने कहा आप आगे बढ़िए. वहीं, जानकार यह भी बताते हैं कि इसके अतिरिक्त एजेंडा कैबिनेट विस्तार और राज्यसभा चुनाव थे. बिहार में जल्द ही पांच राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं और एनडीए में सीट बंटवारे पर चर्चा हुई. इसके अलावा कैबिनेट एक्सपैंशन में नए चेहरों को जगह देने की बात है जिसमें निशांत का नाम उभर कर सामने आ रहा है. जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि निशांत कुमार पहले कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं जिससे उनकी आगे की दावेदारी मजबूत हो. वहीं, जानकार यह भी सवाल उठाते हैं कि सम्राट चौधरी की सीएम पद की महत्वाकांक्षा भी सामने है क्योंकि उनकी नजर भी सीएम की कुर्सी पर है.
नई दिल्ली में बिहार में एनडीए के प्रचंड विजय उपरांत देश के यशस्वी गृह एवं सहकारिता मंत्री, माननीय श्री @AmitShah जी से बिहार के जनप्रिय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar जी के साथ आत्मीय भेंट हुई।
नीतीश कुमार के उत्तराधिकार की अटकलें
दरअसल, राजनीति के जानकारों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा है कि नीतीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए यह दौरा उनकी एग्जिट प्लानिंग का हिस्सा लगता है. जानकारों का कहना है कि बीजेपी नीतीश कुमार की ‘सम्मानजनक और प्रेमपूर्ण विदाई’ चाहती है, ताकि निशांत कुमार की एंट्री सुगम हो. इसके साथ ही बीजेपी एनडीए की स्थिरता सुनिश्चित करना चाहती है. बीजेपी की रणनीति साफ है कि बीजेपी के लिए सबसे महत्वपूर्ण नीतीश कुमार हैं. कुल मिलाकर, विकास के एजेंडे, कैबिनेट विस्तार और राज्यसभा की सीटों पर चर्चा के साथ नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा विकास से ज्यादा उत्तराधिकार पर केंद्रित भी बताया जा है. यदि निशांत कुमार राजनीतिक रूप से सक्रिय होते हैं तो यह नीतीश कुमार के एग्जिट का संकेत होगा.