Ramba Ho to Hawa Hawa ranveer singh and akshay khanna Dhurandhar features magic of 5 vintage songs Did you Notice| धुरंधर में छिपा है 5 विंटेज म्यूजिक का जादू, ‘रंबा हो’ से ‘हवा हवा’ तक, क्या आपने पहचाने?
नई दिल्ली. बॉलीवुड की नई सेंसेशन ‘धुरंधर’ रिलीज के बाद से ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही है. 5 दिसंबर को रिलीज हुई इस फिल्म ने दर्शकों को एक्शन, ड्रामा और नॉस्टेल्जिया का अनोखा मिश्रण परोसा है. निर्देशक आदित्य धर जिन्होंने ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी हिट फिल्म दे चुके हैं. वह इस बार रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर. माधवन और संजय दत्त जैसे सितारों को लेकर एक ऐसी कहानी बुनी है, जहां पुराने क्लासिक हिंदी गाने कहानी का अहम हिस्सा बन गए हैं. फिल्म की मूल साउंडट्रैक (ओएसटी) और बैकग्राउंड म्यूजिक (बीजीएम) को संगीतकार शाश्वत सचदेव ने तैयार किया है, लेकिन जो चीज इसे सबसे अलग बनाती है, वो हैं रेट्रो बॉलीवुड ट्रैक्स का क्रिएटिव इस्तेमाल… ये गाने न सिर्फ फिल्म की वाइब को बढ़ाते हैं, बल्कि कहानी को भावनात्मक गहराई भी देते हैं.
‘ना तो कारवां की तलाश है’
सबसे पहला नाम आता है ‘ना तो कारवां की तलाश है’ का… यह मशहूर गजल, जो मूल रूप से 1960 की फिल्म ‘बरसात की रात’ के लिए रफी साहब की आवाज में रिकॉर्ड हुई थी, ‘धुरंधर’ में दो अलग-अलग अवतारों में नजर आती है. ‘इश्क जलाकर’ वर्जन में यह रनवीर सिंह (हम्जा) के भव्य इंट्रो का हिस्सा बनी, जबकि सोनू निगम के गाए ‘ये इश्क इश्क है’ रूप में यह एंड क्रेडिट्स से ठीक पहले बजती है, जो फिल्म के भावनात्मक रंग को गहरा करती है.
ये है दूसरा ट्रैक
दूसरा ट्रैक है ‘रंबा हो’. उषा उत्थुप के इस 1977 के आइकॉनिक डिस्को ट्रैक (सारेगामा टेलरिंग – डिस्को जैकेट एल्बम से) को फिल्म में एक शादी के सीन में तनावपूर्ण गनफाइट के दौरान फीचर किया गया है.
जब हम्जा रहमान डकैत के बड़े बेटे को बचाने में नाकाम रहता है और गाने की डिस्को एनर्जी उस तनाव को और गहरा बना देती है.
कौन सा है तीसरा ट्रैक
तीसरा जबरदस्त इस्तेमाल हुआ है ‘पिया तू अब तो आजा’ यानी ‘मोनिका ओ माई डार्लिंग’ (फिल्म ‘कारवां’) का… हेलेन के इस लीजेंडरी कैबरे आइटम सॉन्ग को एक रोमांचक बाइक चेस सीन के लिए चुना गया है.
सीन में हम्जा, यलिना को नाइटक्लब पर हुई पुलिस छापेमारी से बचाता है. क्लासिक ग्लैमर और एक्शन का यह मेल सीन को यादगार बना देता है.
‘हवा हवा’ से आया चौथा ट्रैक?
चौथा ट्रैक है पाकिस्तानी सिंगर हसन जहांगीर का 1989 में आया सुपरहिट ‘हवा हवा’. यह गाना एसपी असलम (संजय दत्त) के शानदार इंट्रोडक्शन का हिस्सा है.
सफेद रेगिस्तान में नशीले पदार्थों के तस्करों का सफाया करते हुए संजय दत्त पर बजता यह ट्रैक पूरे सीन को यादगार बना देता है.
5वें ट्रैक में पंजाबी क्लासिक की धुन
क्लाइमैक्स से ठीक पहले बजता है पंजाबी क्लासिक ‘ना दे दिल परदेसी नु’ या ‘जोगी’ (1995) की धुन छा जाती है.
जब रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) को कार में ही हम्जा की चालाक साजिश का पता चलता है. कार के अंदर टकराव शुरू होता है, जिससे सस्पेंस चरम पर पहुंच जाता है.