बुंदेलखंड की बंजर भूमि पर उगाए जाएंगे मोटे आनाज, चित्रकूट में मिलेट्स महोत्सव, जानें आय दोगुनी करने की ट्रिक
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Chitrakoot News : चित्रकूट में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को फिर से लाभ का जरिया बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हो रही है. इसका उद्देश्य सिर्फ एक मेला भर लगाना नहीं, बल्कि किसानों को उस परंपरा से जोड़ना है, जो कभी बुंदेलखंड की पहचान हुआ करती थी. इस मेले में खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि बाजार और उपभोक्ता से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है.
चित्रकूट. यूपी का चित्रकूट जिला खेती-किसानी के लिहाज से कभी बुंदेलखंड का मजबूत स्तंभ माना जाता था. यहां की मिट्टी, मौसम और पारंपरिक ज्ञान ने दशकों तक किसानों को आत्मनिर्भर बनाए रखा, लेकिन समय के साथ हालात बदले. पानी की लगातार कमी, बदलता मौसम, लागत में बढ़ोतरी और फसलों का उचित बाजार मूल्य न मिल पाने के कारण किसानों ने खेती को घाटे का सौदा मानना शुरू कर दिया था. नतीजतन खेत खाली होने लगे और युवा पीढ़ी खेती से दूर होती चली गई. इन्हीं चुनौतियों के बीच अब चित्रकूट में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को फिर से लाभ का जरिया बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हो रही है. कृषि विभाग की ओर से 23 और 24 दिसंबर को जिले के ऑडिटोरियम में दो दिवसीय मिलेट्स महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. मिलेट्स महोत्सव में कृषि, उद्यान संबंधित विभागों के स्टॉल लगाए जाएंगे.
बाजार से भी जोड़ेंगे
इस मेले में किसानों को मोटे अनाज की उन्नत किस्मों, बुआई से लेकर कटाई तक की आधुनिक तकनीक, कम लागत में अधिक उत्पादन और बाजार से सीधे जुड़ने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी. रबी फसलों की खेती से जुड़ी नई संभावनाओं पर भी चर्चा होगी, ताकि किसान एक ही फसल पर निर्भर न रहें और जोखिम कम कर सकें. इस आयोजन में खेती को बाजार और उपभोक्ता से जोड़ने की भी योजना पेश की जाएगी.
बनाई जाएगी लिस्ट
उपनिदेशक कृषि राजकुमार ने लोकल 18 को बताया कि जिलाधिकारी के सहयोग से अब जिले के होटल, रेस्टोरेंट और टूरिस्ट बंगलों में मोटे अनाज से बने व्यंजनों के लिए अलग मेनू तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. इससे जहां पर्यटकों को बुंदेलखंड की पारंपरिक और पौष्टिक डिशेज का स्वाद मिलेगा, वहीं किसानों को अपनी उपज के लिए स्थानीय स्तर पर ही स्थायी बाजार उपलब्ध होगा. मिलेट्स महोत्सव चित्रकूट के किसानों के लिए सिर्फ जानकारी का मंच नहीं, बल्कि उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आ रहा है. अगर यह प्रयास जमीन पर सफल होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब बुंदेलखंड एक बार फिर मोटे अनाज की खेती के लिए पहचाना जाएगा.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें