दिल्‍ली-एनसीआर में घर खरीदना मुश्किल लेकिन मुंबई में आसान, रिलय एस्‍टेट की नई रिपोर्ट से सब हैरान, क्‍या है माजरा

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Home Perchaging Power : क्‍या आपको पता है क‍ि देश के किस शहर में मकान खरीदना सबसे आसान है. इसका मतलब है कि इस शहर में आपकी कमाई का सबसे कम हिस्‍सा ईएमआई में जाता है. इस मामले में दिल्‍ली-एनसीआर इस साल सबसे मुश्किल रहा है, जबकि अहमदाबाद सबसे आसान.

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दिल्‍ली-एनसीआर में घर खरीदना मुश्किल, मुंबई में आसान, जानें अपने शहर का हालदिल्‍ली-एनसीआर में घर खरीदने की क्षमता में गिरावट आई है.

नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक ने साल 2025 में होम लोन की ब्‍याज दरों को 1 फीसदी से भी ज्‍यादा कम कर दिया है. बावजूद इसके दिल्‍ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए खुद का घर खरीदना आसान नहीं. ग्‍लोबल रियल एस्‍टेट फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि होम लोन पर ब्याज दरें घटने के बावजूद दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने घर खरीदने की क्षमता को प्रभावित किया है. हालांकि, इस दौरान मुंबई में घर खरीदना अपेक्षाकृत आसान रहा है.

रियल एस्टेट सलाहकार फर्म ने बताया कि इस साल मुंबई में लोगों की आवासीय संपत्तियों की खरीदने की क्षमता में सुधार हुआ है. नाइट फ्रैंक का आवासीय व्यवहार्यता सूचकांक यह मापता है कि किसी शहर में एक घर के लिए मासिक किस्त (ईएमआई) चुकाने के लिए परिवार की कमाई का कितना फीसदी पैसा जरूरी है. इस सूचकांक के मुताबिक, किसी शहर में 40 फीसदी का सूचकांक स्तर यह दर्शाता है कि वहां के औसत परिवार को ईएमआई पर अपनी कुल कमाई का 40 फीसदी खर्च करना होगा. आमतौर पर मासिक किस्त और आय के बीच 50 फीसदी से अधिक का अनुपात खरीदार के लिए असुविधाजनक माना जाता है.

अहमदाबाद में घर खरीदना सबसे सस्‍ता
रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद घर खरीद पाने की क्षमता के लिहाज से शीर्ष आठ शहरों में सबसे सुलभ है, जहां ईएमआई और कमाई का अनुपात 18 फीसदी है. इसके बाद पुणे और कोलकाता में 22 फीसदी का अनुपात आता है. मुंबई में घर खरीदारों की पहुंच में इस साल सुधार हुआ है. वहां पर ईएमआई और कमाई का अनुपात 2025 में घटकर 47 फीसदी तक आ गया है. दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में मासिक किस्त और कमाई के बीच का अनुपात 2025 में 28 फीसदी रहा जो पिछले वर्ष के 27 प्रतिशत की तुलना में मामूली रूप से बढ़ा है.

सिर्फ एनसीआर में ही बिगड़ा आंकड़ा
नाइट फ्रैंक ने बताया कि एनसीआर इकलौता ऐसा प्रमुख आवास बाजार रहा है, जहां इस साल खरीदारों की पहुंच में कमी आई है. इसका कारण यहां प्रमुख संपत्तियों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और प्रीमियम आवासीय खंड में गतिविधियों का बढ़ना है. हालांकि, सलाहकार फर्म ने कहा कि एनसीआर में घर खरीदारों की पहुंच अब भी स्वीकार्य सीमा के भीतर बनी हुई है और यह अभी चिंताजनक स्तर तक नहीं पहुंची है. रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में इस साल हुई कटौती से ईएमआई का बोझ कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन घरों की बढ़ती कीमतें अभी भी खरीदारों के लिए चुनौती बनी हुई हैं.

एनसीआर में सबसे ज्‍यादा बढ़ी कीमत
एनसीआर में सिर्फ मकानों की पर्चेजिंग पॉवर में ही कमी नहीं आई है, बल्कि यहां कीमतों में उछाल भी सबसे ज्‍यादा दिखा है. रियल एस्‍टेट की सलाहकार फर्म प्रॉपटाइगर ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि 2025 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 8 प्रमुख शहरों में मकानों की कीमत 7 से 19 फीसदी तक बढ़ी. सबसे ज्‍यादा बढ़ोतरी दिल्‍ली-एनसीआर में दिखी, जहां सालाना आधार पर 19 फीसदी तो तिमाही आधार पर करीब 10 फीसदी का उछाल दिखा है. यही वजह है कि यहां मकान खरीदने की क्षमता में पिछले साल के मुकाबले गिरावट आई है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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दिल्‍ली-एनसीआर में घर खरीदना मुश्किल, मुंबई में आसान, जानें अपने शहर का हाल

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