Public Opinion : “गर्म हवाएं ज्यादा चलेंगी, दिल्ली बना सकती है रेगिस्तान”, अरावली पर बोला गाजीपुर, कहा- झेलेंगी कई पीढ़ियां

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Ghazipur Public Opinion on Aravalli : अरावली पर्वत श्रृंखला पर खनन और कटाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. सोशल मीडिया पर लोगों की चिंताई साफ देखी जा सकती हैं. विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर अरावली कमजोर हुई तो उत्तर भारत में गर्मी बढ़ेगी, बारिश का संतुलन बिगड़ेगा और रेगिस्तान दिल्ली तक फैल सकता है. इसका असर आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ेगा.

गाजीपुर. इन दिनों देश में अरावली पहाड़ को लेकर चर्चा तेज है. सरकार खनन और विकास की बात कर रही है, जबकि पर्यावरण से जुड़े लोग इसे खतरा बता रहे हैं. सवाल यह है कि विकास के नाम पर क्या इतने पुराने पहाड़ काटना सही है. क्या इसका असर आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा. लोकल 18 से बात करते हुए राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर के वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार चौधरी कहते हैं कि अरावली सिर्फ पत्थर और मिट्टी का ढेर नहीं है, यह एक पूरा नेचुरल सिस्टम है. इसमें पेड़-पौधे, जानवर, पक्षी और छोटे जीव रहते हैं. अगर यहां खनन हुआ तो यह पूरी व्यवस्था टूट जाएगी. उनका कहना है कि असली विकास वही है जिसमें भविष्य को नुकसान न पहुंचे. अगर पहाड़ टूटेंगे तो पूरा प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाएगा. सरकार ने जो 100 मीटर का दायरा तय किया है, वह बहुत कम है और इससे अरावली को बचाया नहीं जा सकता. सही जांच जरूरी है.

बिना सोचे-समझे

जंतु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीष कुमार सोनकर का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ी को परेशानी झेलनी पड़े. उन्होंने कहा कि खनन से पहले पर्यावरण कानून और वन्यजीव सुरक्षा कानून को गंभीरता से देखना चाहिए. अगर बिना सोचे-समझे फैसला हुआ तो जंगल, जानवर और आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा.

क्यों इतना खतरनाक

राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार यादव बताते हैं कि अरावली पहाड़ बहुत पुराने हैं और इनका काम सिर्फ जमीन पकड़ना नहीं है. ये राजस्थान के रेगिस्तान को दिल्ली और उत्तर भारत की तरफ बढ़ने से रोकते हैं. यही पहाड़ बारिश के रास्ते को भी कंट्रोल करते हैं. अगर ये कटे तो कहीं ज्यादा बारिश होगी, कहीं सूखा पड़ेगा. गर्म हवाएं और लू ज्यादा चलेंगी और तापमान बढ़ेगा. उनका कहना है कि विकास होना चाहिए लेकिन सिर्फ पैसे के लिए प्रकृति को कुर्बान करना सही नहीं है. यह बहस सिर्फ अरावली की नहीं है, यह आने वाले वक्त की है. पहाड़ काटना आसान है, लेकिन उसे बनाएगा कौन.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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