‘वहां कोई भारतीय सुरक्षित नहीं’, जान बचाकर देश लौटे संगीतकार ने सुनाई आपबीती, बांग्लादेश में छुपानी पड़ी पहचान

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बांग्लादेश उबल रहा है, अपने ही घावों को कुरेद रहा है. खुद को बर्बाद कर रहा है. उन्मादी भीड़ चुन-चुन कर लोगों को धर्म-जाति के आधार पर टारगेट कर रही है. ईश निंदा के आरोप में उन्मादी भीड़ ने एक हिंदू शख्स को जलाकर मार दिया. अब बांग्लादेश से लौटे सरोद वादक शिराज अली खान ने आखों-देखा हाल बयां किया और बताया कि उन्होंने खुद को कैसे बचाया. संगीतकार ने बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल पर भी खुलकर चर्चा की.

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'वहां कोई भारतीय सुरक्षित नहीं', जान बचाकर देश लौटे संगीतकार ने सुनाई आपबीतीम्यूजिक कॉन्सर्ट में शामिल होने गए थे सरोज वादक (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: संगीत की दुनिया की मशहूर शख्सियत सरोद वादक शिराज अली खान म्यूजिक कॉन्सर्ट के लिए बांग्लादेश गए थे. वहां हालात इतने खराब है कि उन्हें अपनी पहचान छुपाकर भागना पड़ा. सरोद वादक ने ‘न्यूज18’ से खास बातचीत में बताया कि बांग्लादेश में फिलहाल भारतीय नागरिकों के लिए हालात अच्छे नहीं हैं और उन्हें मुसीबत से बचने के लिए अपने सरनेम की मदद लेनी पड़ी. बांग्लादेश में चुन-चुनकर हिन्दुओं को मारा जा रहा है.

बांग्लादेश पहुंचने पर क्या हुआ?
सरोद वादक शिराज अली खान ने बताया, ‘मुझे चार इवेंट में परफॉर्मेंस के लिए बुलाया गया था. मैं 16 दिसंबर को बांग्लादेश पहुंचा और तब माहौल सामान्य लग रहा था. लेकिन इवेंट में बहुत कम लोग आए, जिससे मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ है. बाद में लोकल लोगों ने बताया कि हालात बिगड़ रहे हैं. उन्होंने मुझे सलाह दी कि मैं भारतीय होने की बात किसी को न बताऊं.

सरनेम की वजह से बच गए संगीतकार
संगीतकार ने आगे बताया, ‘मुझे एक चेकपॉइंट पर रोक लिया गया था. पुलिस लोगों की जांच कर रही थी और उन्होंने कहा कि वे देख रहे हैं कि कोई विदेशी करेंसी तो नहीं ले जा रहा. मैं हैरान रह गया. मेरे पास आधार कार्ड था. मैंने खुद को शिराज अली खान बताया और भारतीय होने की बात नहीं कही. मुझे सलाह दी गई थी कि पासपोर्ट साथ न रखें, इसलिए वह मेरे पास नहीं था. होटल के स्टाफ ने भी मुझे कहीं भी अपनी पहचान न बताने की सलाह दी. आमतौर पर जब मैं बांग्लादेश जाता हूं तो कोलकाता बंगला बोलता हूं, लेकिन इस बार मैंने जानबूझकर लोकल बंगला बोली. किस्मत से मेरा सरनेम खान है, जिसे मैंने जोर देकर बताया कि मैं मुस्लिम हूं. अगली सुबह मुझे छायानट में हुई घटना के बारे में पता चला. हमें वहां जाना था. मैंने भारतीय दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह बंद था. किसी तरह मैं भारत लौटने में कामयाब रहा.’

बांग्लादेश में फंसी हैं मां
सरोद वादक ने आगे कहा, ‘मेरी मां अभी भी बांग्लादेश में हैं क्योंकि मेरे कुछ परिवार के सदस्य वहीं रहते हैं. उन्हें वापस आना है. मैंने देखा कि कई भारतीय नागरिक पश्चिम बंगाल लौटने की कोशिश कर रहे थे. उम्मीद है कि मेरा तबला प्लेयर सोमवार तक लौट आएगा. मेरी जड़ें बांग्लादेश में हैं और मैं वहां सिर्फ संगीत साझा करने जाता था. पहले लोग बहुत स्वागत करते थे. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. वहां अब कोई भी भारतीय सुरक्षित नहीं है. माहौल पूरी तरह भारत विरोधी हो गया है. लोग हमले के बहाने ढूंढते नजर आते हैं. यह सिर्फ ‘खान’ होने की बात नहीं है. वहां कोई भी इंडियन सुरक्षित नहीं है.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

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