Save Aravalli Range पोस्टर के साथ सड़कों पर क्यों उतरी आम जनता? सरकार के सामने रख दी ये मांग
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Mirzapur News: अरावली के बचाव को लेकर आम जनता प्रदर्शन कर रही है. केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 100 मीटर से कम पर्वत को आरावली पर्वत श्रृंखला नहीं माना जाए. अब इसको लेकर पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है.
मिर्जापुर: अरावली पहाड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्णय आने के बाद प्रकृति प्रेमी चिंतित हैं. अरावली पहाड़ को लेकर केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 100 मीटर से कम पर्वत को आरावली पर्वत श्रृंखला नहीं माना जाए. इस जवाब के बाद से पर्यावरण को लेकर चर्चा शुरू हो गई. पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सरकार की ओर से दाखिल जवाब के बाद पहाड़ों के खनन के कई रास्ते खुलेंगे. ऐसे में सरकार को कानून बनाकर इसको संरक्षित करने के लिए कदम उठाना चाहिए, ताकि हजारों वर्ष पुरानी पर्वत को बचाया जा सके.
आयुष सिंह ने कहा कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से एक जवाब दाखिल किया गया. पर्यावरण मंत्रालय की ओर से कहा गया कि जो 100 मीटर से कम वाली पहाड़ियां हैं, उन्हें आधार नहीं माना जाना चाहिए. इस जवाब के बाद जो आरावली की पहाड़ी है, उसकी लंबाई 100 मीटर से कम है, उन्हें उससे अलग कर दिया जाएगा. यह पहाड़ी का यह भू-भाग काफी ज्यादा है. जब सरकार उसे हिमालय की पर्वत श्रृंखला नहीं मानेगी तो जाहिर तौर पर उसका खनन किया जाएगा. यह आशंका पर्यावरणविदों को है. इसके लिए देशभर में पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश है. हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री खुद इस मामले में हस्तक्षेप करें और अरावली को संरक्षित करने के लिए अध्यादेश बनाए, जिससे इसे बचाया जा सके.
सदन में लाया जाए अध्यादेश
संजय सिंह गहरवार ने कहा कि मुख्यत: मेरी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है कि संसद में अध्यादेश में लाया जाए और इसे संरक्षित किया जाए. पर्यावरण का जो संकट है, वह सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि पूरे देश में है. ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि जीना मुश्किल हो गया है. अगर किसी आदेश के बाद अरावली की पहाडियों को छेड़ा गया तो सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई राज्यों में हालात खराब हो जाएंगे. भारत सरकार से विनम्र अनुरोध है कि कानून बनाकर इसकी संप्रभुता की रक्षा करें, ताकि आम जनमानस की रक्षा हो सके.
उद्योगपतियों के नाम
वसीम रजा ने कहा कि यहां पर हम सभी पर्यावरण के संरक्षण को लेकर आए हुए हैं. एक पेड़ मां के नाम और पूरा जंगल उद्योगपतियों के नाम, ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए. आज इतना हालात खराब है कि सांस लेने का संकट हो गया है. सरकार को संरक्षण को लेकर कदम उठाना चाहिए. शिवम श्रीवास्तव ने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए हमारी मुहिम चल रही है, मगर इसपर सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है. अगर सरकार इसपर ध्यान नहीं देगी तो सड़क से लेकर सदन तक प्रदर्शन करेंगे.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.