डेढ़ लाख का मोबाइल 35000 में बेचता था शख्स, 8वीं पास के दिमाग के सामने करोड़ों कमाने वाले भी भरने लगे पानी | samsung mobile | 8th pass man earning per day crores rupees| delhi police caught | karolbagh khan market news

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नई दिल्ली. देश की राजधानी का करोल बाग इलाका, जो मोबाइल एक्सेसरीज और गैजेट्स के लिए पूरे उत्तर भारत में मशहूर है, वहां से ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ब्रांडेड मोबाइल खरीदने वालों के होश उड़ा दिए हैं. दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए नकली सैमसंग प्रीमियम मोबाइल फोन बनाने और बेचने वाले एक बहुत बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. खास बात यह है कि इस गिरोह का सरगना आठवीं पास है. आठवीं पास शख्स मोबाइल बनाने वाली कंपनी सैमसंग का बंटाधार कर रहा था. लेकिन दिल्ली पुलिस ने न केवल उस शख्स के पास से 512 से ज्यादा तैयार फोन जब्त किए हैं, बल्कि उस कारखाने का भी पर्दाफाश किया है जहां इन फोनों को असली वाला रूप दिया जा रहा था.

बेदनपुरा की गलियों में ‘चीन’ का जाल पुलिस को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि करोल बाग के बेदनपुरा इलाके की भीड़भाड़ वाली गलियों में कुछ लोग चोरी-छिपे प्रीमियम मोबाइल फोन की क्लोनिंग कर रहे हैं. स्पेशल स्टाफ ने जब अपनी जांच आगे बढ़ाई, तो उन्हें एक दुकान का पता चला जहां का दरवाजा तो हमेशा बंद रहता था, लेकिन अंदर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के काम होने की आवाजें आती थीं. जब पुलिस ने वहां छापा मारा, तो दृश्य देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. वहां सैमसंग के सबसे महंगे मॉडल्स जैसे कि ‘एस-24 अल्ट्रा’, ‘गैलेक्सी फोल्ड’ और ‘फ्लिप’ सीरीज के फोन धड़ल्ले से असेंबल किए जा रहे थे.

डेढ़ लाख का मोबाइल 35000 में

8वीं पास का ‘दिमाग’ और चीनी पुर्जे इस पूरे गिरोह का सरगना ‘हकीम’ नाम का शख्स है, जो महज 8वीं पास है. शिक्षा कम होने के बावजूद हकीम तकनीकी तौर पर इतना शातिर था कि उसने चीन से मोबाइल पार्ट्स मंगवाने का पूरा नेटवर्क सेट कर रखा था. आरोपी चीन से मदरबोर्ड, स्क्रीन, बैटरी और बॉडी पैनल मंगवाते थे. बेदनपुरा की इस छोटी सी दुकान में हकीम के साथ मेहताब अहमद अंसारी, रवि आहूजा और राहुल मिलकर इन पार्ट्स को जोड़ते थे.

मोबाइल नकली लेकिन देखने में असली

इन ठगों की सबसे बड़ी चाल थी ‘IMEI’ नंबर. मोबाइल फोन की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले आईएमईआई नंबर को ये फर्जी तरीके से प्रिंट करते थे. पुलिस को मौके से 459 फर्जी आईएमईआई स्टिकर मिले हैं. ये स्टिकर फोन के पीछे और डिब्बे पर इस तरह चिपकाए जाते थे कि कोई भी आम ग्राहक इन्हें देखकर यह नहीं कह सकता था कि फोन नकली है. 35 हजार में ‘प्रीमियम’ डील का झांसा सैमसंग के अल्ट्रा और फोल्ड सीरीज के असली फोन की कीमत बाजार में 1 लाख रुपये से लेकर 1.60 लाख रुपये तक होती है. हकीम और उसका गिरोह इन नकली फोन को ‘ओपन बॉक्स सेल’ या ‘इम्पोर्टेड यूनिट’ बताकर लोगों को महज 35,000 से 40,000 रुपये में बेच देते थे.

कम कीमत के लोभ में फंस रहे थे लोग

कम कीमत में महंगा और प्रीमियम फोन पाने के लालच में लोग आसानी से इनके जाल में फंस जाते थे. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे इन फोन को न केवल करोल बाग के फुटपाथों पर बेचते थे, बल्कि ऑनलाइन क्लासिफाइड वेबसाइट्स के जरिए भी ग्राहकों को चूना लगाते थे. छापेमारी के दौरान दिल्ली पुलिस ने मौके से 512 तैयार नकली प्रीमियम मोबाइल फोन बरामद किए हैं. इसके अलावा 124 हाई-टेक मदरबोर्ड, 138 बैटरियां और मोबाइल असेंबल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई खास औजार भी जब्त किए गए हैं.

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने हकीम, मेहताब, रवि और राहुल के खिलाफ करोल बाग थाने में कॉपीराइट एक्ट और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि अब इस बात की जांच की जा रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को यह नकली फोन बेचे हैं. साथ ही, उन कूरियर कंपनियों और सप्लायर्स की भी पहचान की जा रही है जो चीन से इन अवैध पार्ट्स को लाने में गिरोह की मदद कर रहे थे. पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे मोबाइल फोन हमेशा अधिकृत स्टोर से ही खरीदें और भारी डिस्काउंट के लालच में आकर किसी अनजान व्यक्ति से फोन न लें. यह गिरोह न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा था, बल्कि नकली बैटरियों के इस्तेमाल से ग्राहकों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर रहा था.

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