8 तरह के वो सूप कौन से, जो मुगल बादशाह जमकर पीते थे, खासकर जाड़ों के दिनों में

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जाड़ों के इस सीजन में कड़ाके की ठंड के दिन हैं. तापमान गिर रहा है. सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ होने लगी है. इस मौसम का सबसे हिट और पसंदीदा पेय सूप है. क्या आपको मालूम है कि मुगल बादशाह किस तरह के सूप पसंद करते थे. अगर किताबों और ऐतिहासिक तथ्यों की बात करें तो पता लगता है कि 8 तरह के सूप मुगल राजाओं को पसंद थे. इसमें वेज भी थे और नानवेज सूप भी. वैसे सूप की कहानी भी कोई कम दिलचस्प नहीं.

शाहजहां के शासनकाल में लिखी गई एक कुकबुक लिखी गई – “नुस्खा-ए-शाहजहानी”. ये मुगल शाही रसोई की दिलचस्प रेसिपीज के बारे में बताती है. ये जीभ पर पानी ला देने वाली कुकबुक यूं तो पुलाव, कबाब, मछली, समोसे, मिठाइयों और ब्रेड जैसे कई उन व्यंजनों के बारे में बताती है और बनाने की नुस्खा भी बताती है, जो मुगलों को पसंद थी लेकिन इसमें खासतौर पर 8 सूप का जिक्र किया गया है. इस किताब में एक पूरा अध्याय ही सूप पर है.

जिसमें विभिन्न मसालों और जड़ी-बूटियों की खुशबू का जिक्र है. ये बताती है कि किस तरह शाहजहां तक आते आते मुगलों की शाही किचन में भारतीय परंपराओं के असर वाले खाने बनने लगे थे. उनमें इस्तेमाल होने वाली जड़ी बूटियों और मसालों से शाही किचन से लेकर दस्तरख्वान तक महकने लगे थे. रसोई के पास निकलने वाले लोगों के नाक में जब ये सुगंध जाती थी तो उनकी भूख अपने आप खुल जाती थी.

कुकबुक में नान, आश (सूप), कालिया और दो-पियाज़ा (प्याज और सब्जियों के साथ पकाया गया मेमना), भरता, ज़ीर बिरयानी और पुलाव के साथ कबाब, हरीसा, शिशरंगा और खगीना (विभिन्न प्रकार के ग्रिल्ड मांस) और शिरिनीहा (एक मुगल मिठाई) जैसी चीज़ों को पकाने के बारे में खूब जानकारी दी गई है. वैसे आपको बता दें कि मुगल राजाओं, विशेष रूप से शाहजहां के शाही रसोईघर में जो कई तरह के सूप तैयार किए जाते थे, वो फारसी प्रभाव से प्रेरित थे.

कौन से थे ये 8 तरह के सूप

ये कुकबुक में करीब 8 तरह के आश यानि सूप के बारे में बताती है. ये सूप भेड़ से लेकर चिकन, सब्जियों, गेहूं, चावल आदि को मिलाकर बनाए जाते थे. सबके अलग अलग नाम थे.

1. आश-ए-केशतालेह – भेड़ के मांस, सब्जियों और गेहूं के नूडल्स वाला गाढ़ा सूप.
2. आश-ए-बावर्दी – भेड़ के मांस भरी रोटी के साथ गाढ़ा दही का सूप
3. आश-ए-लंग बराह (नूडल्स के साथ दही के स्वाद वाला गाढ़ा भेड़ के मांस का सूप.
4. आश लंग बराह चश्नीदार – सब्जियों और नूडल्स के साथ मीठा भेड़ के मांस का सूप.
5. आश-ए-संगशीर – चने और सब्जियों के साथ भेड़ के मांस का सूप.
6. आश-ए-नखुदी – गाढ़ा मीठा भेड़ के मांस और सब्जियों का सूप.
7. शोरबे नखुदाब – चिकन के अंगों से बना सूप.
8. शोरबे गोश्त -चावल के साथ कीमा बनाया हुआ भेड़ के मांस का सूप

अबुल फजल की किताब आइन-ए-अकबरी में मुगल रसोई के व्यंजनों के बारे में विस्तार से बताया गया है. जिसमें कीमा शोरबा और यखनी जैसे सूपों का जिक्र है. ये मांस-आधारित होते थे और मसालों जैसे दालचीनी, लौंग, जीरा, और घी से तैयार किए जाते थे. औरंगजेब के शासनकाल के दौरान लिखी किताब खुलासत-ए-माकुलात उ मशरुबात में भी स्टू और सूप जैसे व्यंजनों का जिक्र है, जो मांसाहारी और शाकाहारी दोनों रूपों में थे.

राजसी भोजन का हिस्सा 

15वीं सदी में दिल्ली सल्तनत की किताब नीमतनामा में सूपों को स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक बताया गया है. इन्हें राजसी भोजन का हिस्सा माना जाता था, जो मसालों से भरपूर लेकिन संतुलित होते थे. ये सारी किताबें कहती हैं कि मुगल बादशाह और उनका दरबार सूप का नियमित सेवन करते थे, और इसके पीछे कई भूख बढ़ाने से लेकर स्वास्थ्य और कल्चरल कारण भी थे.

हल्का, पाचक और पौष्टिक 

मुगल भोजन अक्सर भारी, मसालेदार और प्रोटीन-युक्त होता था. सूप को हल्का, पाचक और पौष्टिक माना जाता था, जो भोजन शुरू करने से पहले पाचन तंत्र को तैयार करता था. विशिष्ट सामग्रियों वाले सूपों का उपयोग ठंड, कमजोरी, या बीमारी में किया जाता था. जहांगीर के संस्मरणों में बीमारी के दौरान चिकन शोरबा पीने का उल्लेख है.

मुगल यूनानी तिब्ब चिकित्सा प्रणाली में विश्वास रखते थे, जिसके अनुसार शरीर के चार “दोष” (कफ, पित्त, वात, सांद्र) को संतुलित करने के लिए सूप उपयोगी थे. उदाहरण के लिए गर्म तासीर वाला सूप (जैसे बतख या मटन) सर्दियों में पिया जाता था. सूप को अन्य व्यंजनों का आधार भी बनाया जाता था. मांस या हड्डियों को लंबे समय तक उबालकर यख़नी तैयार की जाती थी, जिसका उपयोग ग्रेवी या चावल पकाने में होता था.

शुरुआती कोर्स के रूप में परोसा जाता था

दावतों में सूप को शुरुआती कोर्स के रूप में परोसा जाता था ताकि मेहमानों की भूख बढ़े. वे भारी मांसाहारी व्यंजनों के लिए तैयार हों. फिर लंबी यात्राओं, शिकार अभियानों या युद्ध के दौरान सूप एक सघन ऊर्जा-युक्त आहार था, जो आसानी से पच जाता था. मुगलों के तुर्क-मंगोल पूर्वज ठंडे इलाकों में सूप का भरपूर सेवन करते थे. फारसी संस्कृति में आश (फारसी सूप) एक प्रमुख व्यंजन था. वैसे भारत में भी यख़नी/शोरबा की परंपरा पहले से मौजूद थी, जिसे मुगलों ने अपनाया और परिष्कृत किया.

कहां हुई सूप की उत्पत्ति

सूप मुख्य रूप से मध्य एशिया और फारसी प्रभाव की देन है. भारत में पहले से रसम या ब्रॉथ जैसे तरल व्यंजन थे, लेकिन मुगल शैली का शोरबा मध्य एशियाई फारसी मूल का है, जो मुगलों द्वारा भारत में लोकप्रिय बनाया गया. वैसे सूप को दुनिया की सबसे पुरानी खाद्य चीजों में एक कहा जाता है, जो मानव सभ्यता से भी पहले की है। पुरातात्विक प्रमाण बताते हैं कि सूप जैसी चीजें 20,000 ईसा पूर्व से बनाई जा रही थीं – जैसे चीन की गुफाओं में मिले बर्तनों पर जलने के निशान, जो गर्म सूप बनाने के संकेत देते हैं.

दुनिया का बेहतरीन सूप

टेस्ट एटलस और सीएनएन की लिस्ट के अनुसार थाईलैंड का ताम खा गेई अक्सर दुनियाभर के सूप में टॉप पर रहता है. ये नारियल मिल्क वाला चिकन सूप है. ये क्रीमी, खट्टा-मीठा-मसालेदार होता है. थाईलैंड में ही सबसे ऑथेंटिक बनता है. बैंकॉक या चियांग माई के स्ट्रीट फूड स्टॉल्स पर लोग इसे खूब पीते हैं. वैसे ये सूप दुनियाभर में अच्छे माने गए हैं
– जापान का तोंकोत्सु (पोर्क बोन ब्रोथ वाला, फुकुओका में बेस्ट)
– वियतनाम का फो (बीफ या चिकन नूडल सूप, हनोई स्टाइल सबसे फेमस)
– फ्रांस का बोउलिबैसे (सीफूड सूप, मार्सेई में ओरिजिनल)
– चीन का लेंजोऊ बीफ नूडल्स सूप
ये सभी सूप टेस्ट एटलस की टॉप रैंकिंग में रहते हैं.

सबसे ज्यादा सेवन किस देश में

सूप का सबसे ज्यादा सेवन यूरोपीय देशों में होता है, खासकर ब्रिटेन और नीदरलैंड्स में. जर्मनी और फ्रांस में सूप की प्रति व्यक्ति खपत 9 लीटर मानी जाती है तो रूस और पूर्वी यूरोप में भी सूप डेली स्टेपल है. एशिया में जापान, वियतनाम और साउथ कोरिया में नूडल सूप बहुत खाए जाते हैं.

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