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Goa Nightclub Fire Incident: गोवा के अरपोरा में ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ क्लब में लगी आग ने 25 जिंदगियां लील लीं, लेकिन असली गुनहगार सुरिंदर कुमार खोसला अब भी पुलिस की पकड़ से दूर लंदन में बैठा है. जमीन मालिक प्रदीप घड़ी अमोणकर ने आरोप लगाया है कि रसूखदारों ने खोसला को भागने में मदद की. हालांकि लूथरा ब्रदर्स सलाखों के पीछे हैं, लेकिन खोसला को भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की कोशिशें तेज कर दी गई हैं. जानिए कानून का लंबा हाथ अब यूके तक कैसे पहुंचेगा?

पणजी. गोवा के अरपोरा गांव स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ क्लब में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस हादसे में 25 मासूमों ने अपनी जान गंवाई थी, लेकिन अब इस मामले में एक ऐसा सनसनीखेज मोड़ आया है जिसने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जमीन के असली मालिक प्रदीप घड़ी अमोणकर ने एक विस्फोटक साक्षात्कार में आरोप लगाया है कि इस पूरे कांड का मुख्य विलेन सुरिंदर कुमार खोसला अब भी आजाद है और उसे कुछ बेहद प्रभावशाली लोग संरक्षण दे रहे हैं.
क्या सिस्टम की मिलीभगत थी?
प्रदीप अमोणकर के दावों ने गोवा की राजनीति में भी उबाल ला दिया है. उनका कहना है कि सुरिंदर कुमार खोसला को जानबूझकर भारत से भागने का रास्ता दिया गया. अमोणकर के मुताबिक, जब पूरा मामला गर्म था, तब खोसला बड़ी आसानी से देश की सीमा पार कर ब्रिटेन पहुंच गया. अमोणकर ने सवाल उठाया कि जब पुलिस ने सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता जैसे आठ बड़े नामों को दबोच लिया, तो आखिर खोसला की लोकेशन ट्रैक करने में इतनी देरी क्यों हुई?
लूथरा ब्रदर्स सलाखों के पीछे, पर मुख्य कड़ी गायब
गोवा पुलिस ने अब तक इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए क्लब के सह-मालिकों, सौरभ और गौरव लूथरा को थाईलैंड से डिपोर्ट करवाकर गिरफ्तार कर लिया है. उनके साथ अजय गुप्ता और पांच अन्य कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया है. जांच में खुलासा हुआ कि क्लब में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी और अवैध निर्माण के कारण आग बुझाने के उपकरण मौके पर काम नहीं कर रहे थे. हालांकि, लूथरा ब्रदर्स की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने यह तो मान लिया कि वे संचालन देख रहे थे, लेकिन दस्तावेजी और वित्तीय साजिशों के पीछे खोसला का दिमाग बताया जा रहा है.
यूके से प्रत्यर्पण को लेकर पुलिस और सरकार की रणनीति
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुरिंदर कुमार खोसला को भारत वापस कैसे लाया जाएगा? गोवा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, खोसला के खिलाफ ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के समन्वय से यूके सरकार को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजने की तैयारी की जा रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे खोसला के बैंक खातों और डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच कर रहे हैं ताकि उसके सटीक ठिकानों का पता लगाया जा सके. भारत और यूके के बीच प्रत्यर्पण संधि होने के बावजूद यह कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है.
अब क्या करेगी जांच एजेंसियां
पीड़ित परिवारों की न्याय की गुहार हादसे में जान गंवाने वाले 25 लोगों के परिवारों के लिए यह खबर किसी गहरे घाव जैसी है कि मुख्य आरोपी विदेश में ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है. अमोणकर ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए ताकि उन ‘प्रभावशाली लोगों’ के चेहरे भी बेनकाब हो सकें जिन्होंने खोसला को भगाने में मदद की. अमोणकर ने यह भी दावा किया कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जो साबित करते हैं कि क्लब के संचालन में भ्रष्टाचार का एक लंबा जाल फैला हुआ था.
फिलहाल, गोवा पुलिस पर भारी दबाव है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन खोसला की वापसी ही इस केस में न्याय का अंतिम पड़ाव साबित होगी. प्रत्यर्पण की इस कानूनी लड़ाई में भारत सरकार का अगला कदम क्या होगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं. क्या 25 मौतों का गुनहगार कभी भारतीय अदालत के कटघरे में खड़ा होगा, या वह ‘विजय माल्या’ और ‘नीरव मोदी’ की फेहरिस्त में शामिल होकर लंदन की सड़कों पर घूमता रहेगा? यह वक्त ही बताएगा.
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भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें