ईरानी महिला को चिकनी-चुपड़ी बातों में उलझा रहा था ड्राइवर-खलासी, दिल्ली पुलिस ने ऐसे निकाल दी सारी हेकड़ी

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नई दिल्ली. देश की राजधानी में विदेशी मेहमानों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले अपराधों पर दिल्ली पुलिस कितनी मुस्तैद है, इसकी एक बानगी कश्मीरी गेट इलाके में देखने को मिली. दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने एक ईरानी महिला के साथ हुई बड़ी चोरी की गुत्थी को महज कुछ ही घंटों में सुलझा लिया है. ऋषिकेश से दिल्ली आई ईरानी महिला का पर्स बस में गया था छूट. ईरानी महिला को बस के ड्राइवर ने बाद में बुलाकर पर्स दे भी दिया. लेकिन इस बीच 10 से 15 मिनट में बस के हेल्पर ने पर्स से 1600 अमेरिकी डॉलर, जो भारतीय करेंसी में 1.35 लाख रुपये होते हैं वह गायब था. लेकिन दिल्ली पुलिस ने बड़ी चालाकी से इसे बरामद कर लिया है. पढ़िए इस महिला को कैसे रकम वापस मिली.

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अली अकबर शाह ने आईएसबीटी कश्मीरी गेट पुलिस चौकी में एक शिकायत दर्ज कराई. डॉ. शाह ने बताया कि उनकी एक मेहमान, जो ईरान की नागरिक हैं, जिनका नाम सुश्री फरिश्ते सयांजली है. अपने साथियों के साथ 13 दिसंबर को भारत घूमने आई थीं. वे डॉ. शाह के मुखर्जी नगर स्थित आवास पर रुकी हुई थीं. घूमने के सिलसिले में वे उत्तराखंड गई थीं और 15 दिसंबर को ‘फ्लिक्सबस’ से वापस दिल्ली लौटीं. दोपहर करीब 1:45 बजे जब वे कश्मीरी गेट आईएसबीटी पर बस से उतरीं, तो जल्दबाजी में अपना पर्स बस की सीट पर ही भूल गईं.

ईमानदारी का ढोंग और नियत में खोट

थोड़ी देर बाद, बस ऑपरेटर का फोन आया कि उनका पर्स बस में रह गया है. यह सुनकर फरिश्ते को राहत मिली, लेकिन जब उन्हें पर्स वापस मिला तो उनके होश उड़ गए. पर्स में रखे 1600 अमेरिकी डॉलर गायब थे. विदेशी मेहमान के साथ हुई इस घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया. डॉ. अली अकबर शाह के बयान पर थाना कश्मीरी गेट में बीएनएस की धारा 305(बी) के तहत एफआईआर संख्या 922/25 दर्ज की गई और जांच शुरू हुई.

1600 डॉलर गायब

पुलिस की टीम और ‘मिडनाइट रेड’ उत्तरी जिले के डीसीपी राजा बांठिया के निर्देशानुसार, कश्मीरी गेट थाने के एसएचओ प्रशांत यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें एचसी मुकेश, एचसी शीशराम और कांस्टेबल बबलेश शामिल थे. टीम की निगरानी एसीपी शंकर बनर्जी कर रहे थे. पुलिस टीम ने तुरंत उस फ्लिक्सबस के ड्राइवर और कंडक्टर को पूछताछ के लिए बुलाया. कंडक्टर ने बताया कि सीट पर लावारिस पड़े पर्स को हेल्पर मोनिश ने उठाकर उसे सौंपा था.

दिल्ली पुलिस ने ऐसे की बरामदगी

जब पुलिस ने 26 वर्षीय हेल्पर मोनिश से पूछताछ शुरू की, तो शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. उसने दावा किया कि उसे पर्स वैसा ही मिला था जैसा उसने कंडक्टर को दिया. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, तो वह टूट गया. उसने कबूल किया कि पर्स लौटाने से पहले उसने डॉलर निकाल लिए थे. मोनिश की निशानदेही पर पुलिस ने 15-16 दिसंबर की आधी रात को जहांगीरपुरी स्थित उसके घर पर छापेमारी की और चोरी किए गए पूरे 1600 डॉलर बरामद कर लिए.

लालच में आकर चुराया था

आरोपी का प्रोफाइल गिरफ्तार आरोपी मोनिश जहांगीरपुरी का रहने वाला है और पिछले एक साल से फ्लिक्सबस में हेल्पर के तौर पर काम कर रहा था. वह केवल 10वीं कक्षा तक पढ़ा है और लालच में आकर उसने विदेशी मेहमान की रकम पर हाथ साफ किया था.

विदेशी मेहमानों के बीच बढ़ा भरोसा दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल चोरी हुई रकम को सुरक्षित वापस दिलाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और दिल्ली पुलिस की छवि को भी मजबूती दी है. ईरानी नागरिक फरिश्ते सयांजली ने अपनी रकम वापस पाकर दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त किया. डीसीपी राजा बांठिया ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि विदेशी नागरिकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, दिल्ली पुलिस की नजरों से बच नहीं सकता.

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