Student Gives Birth While Appearing for Exam in samastipur
Last Updated:
Samastipur News: रोसड़ा प्रखंड स्थित शशि कृष्णा कॉलेज के परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने आई छात्रा रविता कुमारी ने बच्चे को जन्म दिया. स्नातक परीक्षा देने आई एक छात्रा अचानक परीक्षा के दौरान प्रसव पीड़ा से कराहने लगी. छात्रा की हालत देख शिक्षक और कर्मचारी घबरा गए, लेकिन उन्होंने सूझबूझ और संवेदनशीलता का परिचय दिया. जल्दबाजी में छात्रा को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. इसी बीच परीक्षा केंद्र में अचानक नवजात के रोने की आवाज गूंजी.

समस्तीपुर: समस्तीपुर जिले से एक अजीबो-गरीब लेकिन भावनाओं से भरा मामला सामने आया है. जिसने शिक्षा और मातृत्व दोनों की गंभीरता को एक ही पल में जोड़ दिया. रोसड़ा प्रखंड स्थित शशि कृष्णा कॉलेज के परीक्षा केंद्र पर शनिवार को वह दृश्य देखने को मिला. जिसे शायद ही कोई भूल पाए. स्नातक परीक्षा देने आई एक छात्रा अचानक परीक्षा के दौरान प्रसव पीड़ा से कराहने लगी. कुछ ही पलों में परीक्षा हॉल का माहौल बदल गया. जहां कुछ देर पहले प्रश्नपत्र खोलने की बेचैनी थी. वहां अचानक मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा शुरू हो गई. छात्रा की हालत देख शिक्षक और कर्मचारी घबरा गए, लेकिन उन्होंने सूझबूझ और संवेदनशीलता का परिचय दिया. जल्दबाजी में छात्रा को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. इसी बीच परीक्षा केंद्र में अचानक नवजात के रोने की आवाज गूंजी. जिसने पूरे परिसर को भावुक कर दिया.
जानकारी के अनुसार, प्रसव कराने वाली छात्रा की पहचान रविता कुमारी के रूप में हुई है. वह बेगूसराय जिले के छौड़ाही थाना क्षेत्र अंतर्गत मालपुर गांव की रहने वाली हैं और उनकी शादी शिवम कुमार से हुई है. रविता भारद्वाज कॉलेज, शकरपुरा (हसनपुर) में स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं. शनिवार को वह अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा देने के लिए शशि कृष्णा कॉलेज स्थित केंद्र पर पहुंची थीं. परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. महिला कर्मचारियों ने तुरंत स्थिति को समझते हुए छात्रा की मदद की. स्वास्थ्य विभाग को सूचना देकर एंबुलेंस मंगवाई गई, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. मेडिकल टीम के पहुंचने से पहले ही रविता ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दे दिया. यह दृश्य परीक्षा केंद्र पर मौजूद हर व्यक्ति के लिए अविश्वसनीय और भावुक करने वाला था.
मानवता की जीत, यादगार बना परीक्षा का दिन
बाद में पहुंची स्वास्थ्य टीम ने मां और नवजात की जांच की. जिसमें दोनों को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया. इस अप्रत्याशित घटना के बाद परीक्षा केंद्र पर मौजूद शिक्षकों, कर्मचारियों और परीक्षार्थियों के बीच भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा. किसी ने पानी दिया, किसी ने कपड़े का इंतजाम किया तो किसी ने परिजनों को सूचना दी. परीक्षा केंद्र कुछ देर के लिए अस्पताल और परिवार जैसा बन गया. परिजन जब पहुंचे तो उनकी आंखें भी भर आईं. स्थानीय लोगों ने परीक्षा केंद्र के स्टाफ की तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण की खुलकर सराहना की. यह घटना यह बताने के लिए काफी है कि शिक्षा के मंदिरों में सिर्फ किताबों की ही नहीं, बल्कि इंसानियत की भी परीक्षा होती है. रोसड़ा का यह परीक्षा केंद्र अब केवल एक परीक्षा स्थल नहीं, बल्कि उस दिन मां और बच्चे के जीवन की शुरुआत का गवाह बन गया.
About the Author
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें