electoral bonds | Political Parties Donation | BJP Donation | Congress Donation | इलेक्टोरल बॉन्ड रद्द होने के बाद एक साल में ही तीन गुना बढ़ गई राजनीतिक दलों की फंडिंग, ऐसे हुई पैसों की बारिश – After scrapping of poll electoral bonds corporate backed trusts donations to political parties jump 3 fold who benefited more
Political Party Donations: सुप्रीम कोर्ट की ओर से इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को रद्द करने के एक साल बाद गजब की तस्वीर सामने आई है. कंपनियों द्वारा समर्थित ट्रस्ट की ओर से राजनीतिक दलों को जमकर चंदा दिया गया है. शीर्ष अदालत की ओर से इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को रद्द करने के बाद पहले फाइनेंशियल ईयर में ही राजनीतिक दलों पर खूब धनवर्षा हुई है. राजनीतिक चंदा देने के मामले में तीन गुना तक की वृद्धि रिकॉर्ड की गई है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में 9 इलेक्टोरल ट्रस्ट ने कुल मिलाकर ₹3811 करोड़ का चंदा विभिन्न राजनीतिक दलों को दिया है. इसमें भाजपा सबसे बड़ी लाभार्थी पार्टी रही है. कांग्रेस को भी करोड़ों का चंदा मिला है.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को रद्द किए जाने के बाद कॉरपोरेट समर्थित इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में बड़ा उछाल आया है. वित्त वर्ष 2024-25 में 9 इलेक्टोरल ट्रस्ट ने राजनीतिक दलों को कुल 3,811 करोड़ रुपये का दान दिया, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में दिए गए 1,218 करोड़ रुपये की तुलना में तीन गुना से भी ज्यादा है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग को सौंपे गए योगदान विवरण (Contribution Detail) के अनुसार इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिला. भाजपा को 3,112 करोड़ रुपये मिले, जो कुल चंदे का करीब 82 प्रतिशत है. वहीं, कांग्रेस को लगभग 299 करोड़ रुपये यानी करीब 8 प्रतिशत राशि प्राप्त हुई. बाकी सभी राजनीतिक दलों को मिलाकर कुल चंदे का करीब 10 प्रतिशत यानी 400 करोड़ रुपये मिले.
देश में कितने इलेक्टोरल बॉन्ड रजिस्टर्ड?
रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल देश में 19 इलेक्टोरल ट्रस्ट रजिस्टर्ड हैं, लेकिन 20 दिसंबर तक केवल 13 ट्रस्ट के योगदान विवरण चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध थे. इनमें से 9 ट्रस्ट ने चंदा देने की जानकारी दी, जबकि चार ट्रस्ट (जनहित, परिवर्तन, जय हिंद और जय भारत) ने वित्त वर्ष 2024-25 में कोई चंदा नहीं दिया. प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट इस साल भाजपा का सबसे बड़ा दानदाता बनकर उभरा. इस ट्रस्ट ने भाजपा को 2,180.07 करोड़ रुपये का चंदा दिया. प्रूडेंट ट्रस्ट को जिंदल स्टील एंड पावर, मेघा इंजीनियरिंग, भारती एयरटेल, ऑरोबिंदो फार्मा और टोरेंट फार्मास्युटिकल्स जैसी बड़ी कंपनियों से चंदा मिला. हालांकि, इस ट्रस्ट ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी को भी दान दिया, लेकिन इसका करीब 82 प्रतिशत हिस्सा भाजपा को गया.
किसने किसको कितना दिया चंदा?
प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2024-25 में 917 करोड़ रुपये जुटाए और इसमें से 914.97 करोड़ रुपये राजनीतिक दलों को डोनेशन दिया. इसमें से 80.82 प्रतिशत राशि भाजपा को मिली. इस ट्रस्ट के मुख्य दानदाता टाटा समूह की कंपनियां रहीं, जिनमें टाटा संस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टाटा पावर शामिल हैं. अन्य ट्रस्टों की बात करें तो जनप्रगति इलेक्टोरल ट्रस्ट को KEC इंटरनेशनल लिमिटेड से 1.02 करोड़ रुपये मिले, जिसमें से 1 करोड़ रुपये शिवसेना (यूबीटी) को दिए गए. हार्मनी इलेक्टोरल ट्रस्ट को 35.65 करोड़ रुपये का चंदा मिला और इसने 30.15 करोड़ रुपये भाजपा को दिए. न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट को महिंद्रा समूह की कंपनियों से 160 करोड़ रुपये मिले, जिसमें से 150 करोड़ रुपये भाजपा को दिए गए. वहीं, ट्रायम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट ने कुल 25 करोड़ रुपये में से 21 करोड़ रुपये भाजपा को दान किए.
सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक करार देते हुए खत्म कर दिया था. इसके बाद अब कंपनियां और व्यक्ति चेक, डिमांड ड्राफ्ट, यूपीआई या बैंक ट्रांसफर के जरिए राजनीतिक दलों को चंदा दे सकते हैं, जिसकी जानकारी दलों को चुनाव आयोग में देना अनिवार्य है. इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए चंदा देना फिलहाल राजनीतिक फंडिंग का एक बड़ा और पारदर्शी जरिया बनकर उभरा है.