सर्दियों का सुपरफूड है ये हरा पत्ता, हर बाइट में स्वाद का खजाना, सेहत के लिए भी चमत्कारी

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Winter Superfood: राज भाजी गर्म तासीर की होती है. इसलिए ठंड के मौसम में लोग इसे सबसे ज्यादा खाते हैं. ठंड के सीजन में लोग इस भाजी को ढूंढ-ढूंढ कर लाते हैं और घर पर बनाते हैं. क्योंकि सर्दी के मौसम में यह भाजी हर किसी के लिए फायदेमंद मानी जाती है.

Raj Bhaji Benefit: छतरपुर जिले में एक ऐसी भाजी पाई जाती है, जिसे लोग ठंड के मौसम में सबसे ज्यादा खाना पसंद करते हैं. इसे राज भाजी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सभी भाजियों पर राज करती है. यह भाजी अपने स्वाद के लिए भी जानी जाती है. कहा जाता है कि यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है.‌ राज भाजी गर्म तासीर की होती है. इसलिए ठंड के मौसम में लोग इसे सबसे ज्यादा खाते हैं.

रमा बाई बताती हैं कि छतरपुर जिले में ठंड के सीजन में इस भाजी की डिमांड घर-घर बढ़ जाती है. यह भाजी बाजार में कम ही देखने को मिलती है. लोग सर्दी के मौसम में इसे सबसे ज्यादा खाना पसंद करते हैं. रमा बाई बताती हैं कि इस भाजी को बीज से बोया जाता है. लगभग 2 सप्ताह बाद ही यह भाजी तोड़ने लायक हो जाती है. इस भाजी को एक बार बो दिया जाता है, फिर यह अपने आप ही उगती रहती है. इस भाजी का एक पौधा 3 महीने तक भाजी देता है.

सेहत का खजाना है ये भाजी
रमा बाई बताती हैं कि इस भाजी के पौधे का बीज झड़ जाता है, तो यह अपने आप उगती रहती है. इसे बार-बार लगाने की जरूरत नहीं होती है. इसे एक बार लगाओ और बार-बार काट सकते हैं. यह भाजी पालक भाजी की तरह होती है. यह भाजी पालक भाजी की तरह होती है. इस भाजी का एक पौधा 3 महीने तक भाजी देता है. जैसे पालक को एक बार लगाने पर बार-बार काटते हैं, वैसे ही इस भाजी को भी 3 महीने तक बार-बार तोड़कर खा सकते हैं. इस पौधे की पत्तियों को तोड़कर भाजी बनाई जाती है.

ऐसे बनाते हैं भाजी
इस भाजी को पालक भाजी की तरह बनाया जाता है. जैसे आलू और पालक की सूखी सब्जी बनाई जाती है, वैसे ही इस भाजी को भी आलू और लहसुन के साथ सूखी बनाई जाती है. राज भाजी गर्म तासीर की होती है. इसलिए ठंड के मौसम में लोग इसे सबसे ज्यादा खाते हैं. ठंड के सीजन में लोग इस भाजी को ढूंढ-ढूंढ कर लाते हैं और घर पर बनाते हैं. क्योंकि सर्दी के मौसम में यह भाजी हर किसी के लिए फायदेमंद मानी जाती है.

About the Author

Vibhanshu Dwivedi

विभांशु द्विवेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के रहने वाले हैं. पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. पॉलिटिक…और पढ़ें

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