food served in name of dead person right or wrong know by expert, क्या मरे हुए इंसान को खाना देना सही, सिर्फ मान्यता या इसके पीछे छिपा कोई रहस्य? जानें सबकुछ

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Aligarh News: अक्सर देखा जाता है कि मरे हुए इंसान को लोग खाना देते हैं. इस्लाम में भी ऐसी परंपरा है तो आइए जानते हैं कि मरे हुए इंसान को खाना देना कितना सही है और क्या इससे कुछ प्रभाव पड़ता है.

अलीगढ़: मौत के बाद मरे हुए इंसान के नाम पर खाना खिलाने को लेकर समाज में कई तरह की रस्में प्रचलित हैं. कहीं इसे सवाब का जरिया समझा जाता है तो कहीं इसे धार्मिक रस्म का रूप दे दिया गया है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि इस्लाम इस बारे में क्या कहता है. इन्हीं सवालों पर चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने इस्लामी नजरिये से साफ तौर पर पूरी जानकारी दी.

क्या मरे इंसान को खाना देना जायज?

जानकारी देते हुए मुस्लिम धर्मगुरु चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में नीयत यानी कि इरादा और अकीदा मतलब विश्वास की बहुत अहमियत है. अगर किसी मरहूम के नाम पर खाना इस नीयत से खिलाया जाए कि अल्लाह की रज़ा हासिल हो और उसका सवाब मरहूम को पहुंचे, तो ऐसा करना जायज है.

मौलाना ने बताया कि यह खाना रिश्तेदारों, अजीज-ओ-अकारिब यानी कि मिलने झूलने वाले लोग, समाज के जरूरतमंद, गरीब, यतीम और मिसकीन लोगों को खिलाया जा सकता है. इस्लाम में खाना खिलाने की बड़ी फज़ीलत बताई है,लेकिन इसकी शर्त यही है कि नीयत पूरी तरह अल्लाह की रज़ा और मरहूम के सवाब की हो.

इस नियम को बताया गलत

उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर नीयत दिखावा करने की हो या फिर इसे रस्म बना दिया जाए,जैसे 20वां, 30वां, 40वां या किसी तय तारीख पर धार्मिक कार्यक्रम की शक्ल देना, यह तरीका ठीक नहीं है. इस्लाम में ऐसी रस्मों की कोई हैसियत नहीं है. मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन ने 40 दिन तक खाना भेजने की परंपरा को भी गलत बताया और कहा कि इसके बारे में इस्लाम मे नाजायज होने की बात आई है.

इसी तरह कब्र पर खाना देना या यह मानना कि मरहूम खुद खाना खाते हैं, इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है. ऐसे तमाम अमल नाजायज और हराम हैं. उन्होंने कहा कि सही तरीका वही है जिसमें नीयत पाक हो, यकीन दुरुस्त हो और हर अमल सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए किया जाए.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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क्या मरे हुए इंसान को खाना देना सही? सिर्फ मान्यता या इसके पीछे छिपा कोई रहस्य

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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