यमन कल्याण राग से सजे 4 सुरीले गाने, जगा गए जवां दिलों में अरमान, चारों फिल्में निकलीं सुपरहिट – Meena Kumari last movie pakeezah aamol palekar chitchor 4 bollywood movies songs based on raag yaman kalyan all became blockbuster aamir khan films
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Bollywood Superhit Songs Based on Raag Yaman Kalyan : बॉलीवुड में राग-रागिनी पर बने गानों की धुन इतनी कर्णप्रिय होती है कि वर्षों तक दिल-दिमाग में छाई रहती है. बस-कार-पान की दुकान कहीं पर जब ये गाने बजते तो बरबस ही इनसे जुड़ी प्यारी सी यादें उभरने लगती हैं. संगीत दिल को जहां सुकून देता है, वहीं मन को ताजा कर देता है. ऐसा ही एक राग है यमन कल्याण जिस पर बनीं सुरीली धुनों से सजे गानों ने ना केवल लोगों के दिल में जगह बनाई, बल्कि फिल्मों भी सुपरहिट रहीं. एक मूवी तो ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर रही. ये सभी फिल्में 28 साल के अंतराल में बॉक्स ऑफिस पर आई थी. इनमें से दो फिल्में कल्ट क्लासिक में शुमार हैं. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं इनसे जुड़े दिलचस्प तथ्य…

बॉलीवुड फिल्मों के गानों इमोशंस-सिचुएशन के आधार पर बनाए जाते हैं. कुछ गाने इतने यादगार बन जाते हैं कि फिल्म के रिलीज होने के बर्षों बाद तक जेहन में बने रहते हैं. जब भी सोशल मीडिया-रील्स पर सुनाई देते हैं तो इन पर दिल आ जाता है. गुजरे जमाने की यादें ताजा हो जाती हैं. गाने से जुड़ी प्यारे पल रह-रहकर मन-मस्तिष्क में उभरने लगते हैं. इन गानों की कर्णप्रियता के पीछे की असल वजह राग होते हैं. ऐसा ही एक राग यमन कल्याण पर बने 5 गाने जब-जब फिल्मों में आए, गाने-मूवी पर्दे पर छा गए. दिलचस्प बात यह है कि सभी फिल्में सुपरहिट निकलीं. ये फिल्में थीं पाकीजा, चितचोर, राम लखन, राजा हिंदुस्तानी और धड़कन. आइये जानते हैं इन फिल्मों के उन गानों के बारे में जो यमन कल्याण राग पर बेस्ड थे.

सबसे पहले 1972 में आई फिल्म पाकीजा की बात करते हैं जिसका निर्देशन-प्रोडक्शन कमाल अमरोही ने किया था. फिल्म की कहानी भी कमाल अमरोही ने ही लिखी थी. फिल्म को बनाने में 16 साल का लंबा वक्त लगा था. यह फिल्म 4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई थी. पाकीजा एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी. फिल्म में मीना कुमारी, अशोक कुमार, राज कुमार नजर आए थे. फिल्म की कहानी लखनऊ की तवायफ साहिबजान की कहानी को पर्दे पर दिखाती है. पाकीजा फिल्म का म्यूजिक गुलाम मोहम्मद-नौशाद ने दिया था. फिल्म के सभी गाने दिल छूने वाले थे लेकिन एक सॉन्ग ‘मौसम है आशिकाना’ यमन कल्याण राग पर आधारित था. यह गान आज भी उतना ही लोकप्रिय है.

पाकीजा फिल्म की शूटिंग 1958 से शुरू हुई थी. वो जमाना ब्लैक एंड व्हाइट का था. उन्होंने पुराने हिस्से को हटाया और रंगीन फिल्म शूट की. फिर सिनेमास्कोप का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने प्लेन रंगीन पोर्शन को हटाया. अमेरिका की एक कंपनी से कैमरे किराए पर लेकर नए सिरे से फिल्म शूट की. कमाल अमरोही ने बड़ी मेहनत से फिल्म बनाई थी लेकिन दर्शकों को मूवी पसंद नहीं आ रही थी. फिल्म 4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई थे लेकिन दर्शकों का रिएशन बहुत ही ठंडा था. 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी की मौत हो गई. मीना कुमारी की मौत का फिल्म पर बहुत असर पड़ा. दर्शकों को लगा कि मीना कुमारी की वो फिर नहीं देख पाएंगे. फिल्म के प्रति लोगों का नजरिया बदला और सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी. नतीजतन यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई.
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पाकीजा फिल्म के रिलीज होने के 4 साल बाद एक ऐसी फिल्म आई थी जिसका हीरो कॉमन मैन था. यह फिल्म थी चितचोर. चितचोर फिल्म का डायरेक्शन बासु चटर्जी ने किया था. फिल्म की कहानी सुबोध घोष की बंगाली स्टोरी पर बेस्ड थी. फिल्म को राजश्री प्रोडक्शन के बैनर ताराचंद बड़जात्या ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म में आमोल पालेकर-जरीन वहाब लीड रोल में थे. इसके अलावा फिल्म में एके हंगल, दीना पाठक, विजेंद्र घाटगे और मास्टर राजू नजर आए थे. गीत-संगीत रविंद्र जैन का था. फिल्म के सभी गाने सुपरहिट थे. एक गाना ‘जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना’ राग यमन-कल्याण पर आधारित था. इस गाने को येशुदास-हेमलता ने मखमली आवाज में गाया था. चितचोर फिल्म को दो नेशनल अवॉर्ड और एक फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. येशुदास को ‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आके यहां रे’ के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड मिला था.

<br />चितचोर की रिलीज के समय डायरेक्टर बासु चटर्जी खुश नहीं थे. आमोल पालेकर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘यह फिल्म मुंबई में सिर्फ एक थिएटर में रिलीज हुई थी. अंधेरी मुंबई के एक थिएटर में फिल्म रिलीज हुई थी. बाकी कहीं और नहीं. एक ही प्रिंट था. बासु दा ने नाराजगी जताई. ताराचंद ने कहा कि हम फिल्म की सफलता को लेकर सुनिश्चित हैं. हम माहौल बना रहे हैं. अगर यह फिल्म देखनी है तो यहां आकर देखिए. 100 दिन तक फिल्म सिर्फ उसी थिएटर में चली. फिर दूसरे थिएटर्स में रिलीज हुई.’ करीब 45 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 1.15 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह फिल्म जरीना बहाव के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. उन्हें एक नई पहचान मिली.

<br />इस लिस्ट में तीसरा नाम सुभाष घई की फिल्म राम लखन का है. राम लखन फिल्म 27 जनवरी 1989 को रिलीज हुई थी. कहानी अनवर खान ने जबकि स्क्रीनप्ले राम केलकर ने लिखा था. प्रोड्यूसर अशोक घई थे. फिल्म में राखी, जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, डिंपल कपाड़िया, माधुरी दीक्षित, माधुरी दीक्षित, दिलीप ताहिल, रजा मुराद, अमरीश पुरी लीड रोल में थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. गीत आनंद बख्शी ने लिखे थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. इस मूवी ने अनिल कपूर को ‘लखन’ की नई पहचान दी. उनका ‘माय नेम इज लखन’ गाना आज भी सुपरहिट है. फिल्म में सुभाष घई का स्पेशल अपीयरेंस था. ‘तेरा नाम लिया, तुझे याद किया’ सॉन्ग सुभाष घई ने कोरियोग्राफ किया था. फिल्म का एक गाना ‘ओ राम जी बड़ा दुख दीन्हा, तेरे लखन ने बड़ा दुख दीन्हा’ बहुत ही अच्छा बन पड़ा था. यह फिल्म का आइकॉनिक सॉन्ग था जिसे माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था. यह सॉन्ग राग कल्याण यमन पर बनाया गया था. राम-लखन को दो फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. 2.83 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 18 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. फिल्म सुपरहिट थी.

‘ओ राम जी बड़ा दुख दीन्हा’ से जुड़ा दिलचस्प किस्सा हाल ही में माधुरी दीक्षित ने रेडियो नशा को दिए एक इंटरव्यू में शेयर किया. उन्होंने बताया, ‘लता दीदी पहली बार मेरे लिए गा रही थीं. मैं बहुत खुश थी. गाना पिक्चराइज होने वाला था. सरोज खान को सिर्फ गाना दिया गया था, उन्हें मेरा कैरेक्टर और सिचुएशन नहीं बताई गई थी. बस उनसे यह कहा गया था कि आप इसको कोरियोग्राफ कर दीजिए. हम लोकेशन पर पहुंचे. सुभाष घई ने कहा कि अच्छा दिखाइये कि आपने क्या तैयारी की है. स्टोरी में ऐसा था कि एक मासूम लड़की है. जैकी श्रॉफ लखन के भाई है. उनका नाम राम है, मैं उनसे शिकायत कर रही हूं कि आपके भाई ने मुझे बहुत दुख दिया. सरोज जी यह सिचुएशन पता नहीं थी. उन्होंने गाने को बॉलीवुड सॉन्ग की तरह लटके-झटके, मटकते नैन के साथ सेट किया हुआ था. सुभाष जी ने जैसे ही देखा, डांस रुकवा दिया. वो बोले कि माधुरी का कैरेक्टर ऐसा नहीं है. वो बहुत मासूम है. वैसा ही गाना चाहिए. सरोज जी कितनी टैलेंटेड थीं, इसका अंदाजा आप लगाइये कि उन्होंने एक सेकंड में गाने के मूवमेंट बदल दिए. जो पर्दे पर आप देखते हैं, वो सरोज खान जी का कमाल था.’

<br />राम लखन फिल्म के बाद 90 का दशक शुरू हुआ. नदीम-श्रवण ने 1990 में आई ‘आशिकी’ मूवी से बॉलीवुड में म्यूजिक का नया दौर शुरू किया. 11 नवंबर 1996 को नदीम-श्रवण के म्यूजिक से सजी एक फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई.धर्मेश दर्शन डायरेक्टर थे. फिल्म में आमिर खान, करिश्मा कपूर लीड रोल में थे जबकि सुरेश ओबेरॉय, अर्चना पूरन सिंह, मोहनीश बहल सपोर्टिंग किरदार में थे. फिल्म में 51 मिनट की लंबाई के 8 गाने रखे गए थे, सभी गाने एक से बढ़कर एक थे. इसी फिल्म का एक गाना ‘आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बनके’ यमन कल्याण राग पर आधारित था. गाना के बोल-ट्यून-फिल्मांकन लाजवाब था. इस सॉन्ग के लिए उदित नारायण को स्क्रीन अवॉर्ड भी मिला था. 6 करोड़ के बजट में बनी राजा हिंदुस्तानी ने वर्ल्ड वाइड 76 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइब ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.