बेटे के पापों का सजा भुगतेगा बाप! कफ सिरप तस्करी कांड में शुभम और उसके पिता पर चलेगा केस
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन कफ सिरप के आरोपियों की ओर से दाखिल की गई याचिकाओं पर लगातार तीन दिनों तक चली बहस के बाद आज लंच के पहले याचियों और सरकार की दलीलें सुनने के बाद जजमेंट रिजर्व कर लिया था.
कफ सिरप तस्करी का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल.प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट से कोडीन युक्त कफ सिरप सिंडिकेट के सरगना शुभम जायसवाल समेत सभी आरोपियों को बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने शुभम जायसवाल समेत सभी आरोपियों की याचिका खारिज कर दी है. कोडीन कफ सिरप सिंडिकेट के सरगना शुभम जायसवाल समेत अन्य आरोपियों ने एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी. हालांकि याचिका खारिज होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक भी खत्म हो गई. जिसके बाद अब पुलिस गिरफ्तार कर सकती है. जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है.
एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी रोकने के लिए थी याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन कफ सिरप के आरोपियों की ओर से दाखिल की गई याचिकाओं पर लगातार तीन दिनों तक चली बहस के बाद आज लंच के पहले याचियों और सरकार की दलीलें सुनने के बाद जजमेंट रिजर्व कर लिया था. सरगना शुभम जायसवाल समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से 22 याचिकाएं दाखिल की गई थी. फरार सरगना शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद समेत कई याचिकाकर्ताओं ने गाजियाबाद, वाराणसी, जौनपुर, बस्ती, भदोही और सोनभद्र जिले में दर्ज हुए मामलों को चुनौती दी थी.
शुभम जायसवाल पर 25000 रुपये का है इनाम
आरोपियों के खिलाफ विभिन्न जिलों में 128 एफआईआर दर्ज हुई थी. सरगना शुभम जायसवाल पर 25000 का इनाम भी घोषित है. याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निपुण सिंह, नमन अग्रवाल और विवेक चतुर्वेदी पक्ष रखा. जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अपार शासकीय अधिवक्ता परितोष मालवीय ने दलीलें पेश कीं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका हुई खारिज
अपर शासकीय अधिवक्ता पारितोष मालवीय के मुताबिक कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुण दोष के आधार पर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. सरकार की ओर से दलील पेश की गई कि ड्रग स्टॉकिस्ट को जो लाइसेंस दिया गया था. उसका लगातार दुरुपयोग हो रहा था. फेंसेडिल कफ सिरप में कोडीन की मात्रा पाई गई थी. कोडीन नारकोटिक्स के अंतर्गत आता है. यह न केवल ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का उल्लंघन था. बल्कि एनडीपीएस एक्ट का भी खुला उल्लंघन था. कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को मानते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया है.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें