कहां गयी वो ट्रेन: सुभाष चंद्र बोस की ट्रेन, लगातार 150 सालों से दौड़ रही, आज भी इस रूट पर कराती है सफर

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Kalka Mai History News.आज वंदेभारत, अमृतभारत और नमोभारत जैसी आधुनिक ट्रेनें दौड़ रही हैं, जो यात्रियों की पसंदीदा बन चुकी हैं, लेकिन किसी जमाने में यही रुतबा कालका मेल का होता था, जो हावड़ा से चलकर कालका तक चलती है. वही ट्रेन आज नेताजी एक्‍सप्रेस के नाम से चल रही है. क्‍योंकि नेताजी इसी ट्रेन से छिपकर निकले थे. यह ट्रेन करीब 150 साल पुरानी है और देश की आजादी से इसका सीधा कनेक्‍शन है. आइए जानते हैं इस ट्रेन से जुड़ी पूरी कहानी.

देश पहली ट्रेन 1853 में मुंबई से थाणे के बीच चली थी. इसी दौरान देशभर में ट्रेनों को चलाने के लिए ईस्‍ट इंडियन रेलवे कंपनी बनाई गयी और देशभर के कई महत्‍वपूर्ण शहरों में रेलवे ट्रैक बिछाने का काम शुरू हुआ. हावड़ा से दिल्‍ली तक रेल लाइन तैयार की गयी. चूंकि देश की राजधानी कोलकाता होती थी, इसलिए कोलकाता से दिल्‍ली तक साल 1866 में सीधी मेल ( डाक) ले जाने के लिए ट्रेन चलाई गयी. इसका नाम ‘ईस्‍ट इंडियन रेलवे मेल’ रखा गया. ईस्ट इंडियन रेलवे मेल शुरू में 1 Up / 2 Down के रूप में भी जानी जाती थी.

कालका मेल कब पड़ा नाम

ईस्‍ट इंडियन रेलवे मेल हावड़ा से दिल्‍ली तक चलती थी. बाद में रेलवे ट्रैक कालका तक बिछाए गए और ट्रेन सेवा शुरू की गयी. 1891 में अंबाला–कालका लाइन बनने के बाद ईस्‍ट इंडियन रेलवे मेल को दिल्‍ली से बढ़ाकर कालका तक कर दिया गया और इसका नाम कालका मेल रखा गया. तब यह ब्रिटिश अफ़सरों के लिए कलकत्ता से दिल्ली होते हुए शिमला ले जाने के लिए प्रमुख ट्रेन थी.

नेताजी की 124वीं जयंती पर इस ट्रेन का नाम नेताजी एक्‍सप्रेस रखा गया.

कालका मेल के स्‍टापेज कहां-कहां थे

150 साल पहले कालका मेल के स्‍टापेज इतने नहीं थे, जितने आज हैं. यह ट्रेन कहां-कहां थे, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है लेकिन बड़े स्‍टेशनों हावड़ा से चलने के बाद आसनसोल, रानीगंज क्षेत्र, बनारस, मुगलसराय (अब डीडीयू), इलाहाबाद (अब प्रयागराज), कानपुर, आगरा, टूंडला, दिल्ली जैसे स्‍टेशनों पर स्‍टापेज था.

ट्रेन का आजादी से क्‍या है संबंध

सन 1941 में नेताजी को ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता (तब कलकत्ता) में नजरबंद कर रखा था. देश में आजादी की लड़ाई में प्रमुख भूमिका नेता जी की थी. अंग्रेज़ उन्हें बड़ा खतरा मान रहे थे. लेकिन 16 जनवरी की रात नेताजी ने प्‍लाना बनाया और उन्होंने पठान का वेशभूषा बनाई. घर से निकले और ड्राइवर के साथ गोमो स्टेशन पहुंचे. इस दौरान घर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी उन्‍हें पहचान नहीं पाए. वहां से वे कालका मेल में सवार हो गए, जो हावड़ा से दिल्ली जा रही थी.

कैसे पहुंचे दिल्‍ली

फर्स्ट क्लास के एक कंपार्टमेंट में बैठे नेताजी सवार हो गए. भीड़भाड़, सुरक्षाकर्मियों की जांच से बचते बचाते दिल्ली पहुंचे. यहां से वे जर्मनी और जापान पहुंचे और वहीं से आज़ाद हिंद फौज की नींव रखी. यह यात्रा भारत के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा हमेशा के लिए बदल गई.

कब तक एक ही नाम से चलती रही ट्रेन

1866 के बाद से लेकर 2021 तक यह ट्रेन कालका मेल नाम से चलती रही. लोगों कई पीढि़यों ने इस कालका मेल से सफर किया. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती पर यानी 2021 में भारतीय रेलवे ने इस ऐतिहासिक ट्रेन का नाम ‘नेताजी एक्सप्रेस’ रखा.

कितनी दूरी तय करती है

मौजूदा समय ट्रेन नंबर 12311/12312 नेताजी एक्सप्रेस हर दिन हावड़ा से कालका के बीच दौड़ रही है. लगभग 1,700 किलोमीटर का सफर यह 25-26 घंटे में तय करती है. इसमें एसी, स्लीपर और जनरल कोच हैं. यानी हर वर्ग के लिए यह ट्रेन है.

आज कितने स्‍टापेज हैं ट्रेन के

आज इस ट्रेन के कुल 41 स्‍टापेज हैं. हावड़ा जंक्शन से शुरू होकर बर्दवान जंक्शन, दुर्गापुर, आसनसोल जंक्शन, धनबाद जंक्शन, गोमो, एनएससी बोस जंक्शन, गया जंक्शन, डी.डी. उपाध्याय जंक्शन, प्रयागराज जंक्शन, कानपुर सेंट्रल, टूंडला जंक्शन, गाजियाबाद, दिल्ली, पानीपत, कुरुक्षेत्र, अंबाला कैंट, चंडीगढ़ जैसे प्रमुख स्‍टेशन होते हुए कालका पहुंचती है.

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