इडली कैसे बनी साउथ इंडिया का फेमस नाश्ता! जानिए इसका इंडोनेशियाई कनेक्शन, दिलचस्‍प है कहानी

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Idli History And Indonesian Origin : सुबह की शुरुआत अगर गरमागरम इडली, नारियल की चटनी और सांभर से हो जाए, तो दिन अपने-आप अच्छा लगने लगता है. इडली आज साउथ इंडिया के हर घर की रसोई में मौजूद है. सॉफ्ट, हल्की और सेहत से भरपूर इडली को लोग पूरी श्रद्धा से खाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी देसी दिखने वाली इडली की कहानी में एक विदेशी ट्विस्ट भी छुपा हो सकता है? जी हां, इडली की जड़ें शायद भारत से नहीं, बल्कि इंडोनेशिया से जुड़ी हैं. सुनने में थोड़ा चौंकाने वाला लगता है, लेकिन ये सच है.

इडली का जन्म: कहानी शुरू होती है भारत से बाहर
इतिहासकारों की मानें तो इंडोनेशिया में सदियों पहले “केडली” नाम की एक डिश बनाई जाती थी. यह भी चावल से बनती थी और भाप में पकाई जाती थी. जब साउथ ईस्ट एशिया से व्यापारी भारत आए, तो अपने साथ मसाले ही नहीं, बल्कि खाने की ये तकनीकें भी लाए. यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया. प्रसिद्ध फूड हिस्टोरियन के. टी. आचाया ने एक बार बताया था कि आज की इडली का शुरुआती रूप यही “केडली” हो सकता है. यानी जिस इडली को हम पूरी तरह भारतीय मानते हैं, उसकी कहानी समंदर पार से शुरू हुई थी. यह जानकर थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन यही तो खाने की दुनिया का मज़ा है.

अरब व्यापारियों का रोल और भारतीय तड़का
कहानी में अगला ट्विस्ट तब आता है, जब अरब व्यापारियों का जिक्र होता है. माना जाता है कि उन्होंने भारत में फर्मेंटेशन यानी खमीर उठाने की तकनीक को लोकप्रिय बनाया. पुराने भारतीय ग्रंथों में “इड्डलिगे” नाम की डिश का उल्लेख मिलता है, जो इडली का शुरुआती रूप मानी जाती है. हालांकि तब इसकी रेसिपी आज जैसी नहीं थी, लेकिन भाप में पकाने की परंपरा मौजूद थी. यहीं भारतीय रसोइयों ने कमाल दिखाया. उन्होंने विदेशी तकनीक में अपने देसी इंग्रीडिएंट्स मिलाए और धीरे-धीरे इडली पूरी तरह भारतीय बन गई.

केडली से इडली तक: बदलता स्वाद, बढ़ती पहचान
12वीं सदी के ग्रंथ मानसोल्लास और वड्डाराधने में भी चावल से बनी भाप वाली डिश का जिक्र मिलता है. बाद में चावल के साथ उड़द दाल मिलाई गई, जिससे इडली ज्यादा नरम, फूली और स्वादिष्ट बन गई. यही वो पल था, जब इडली ने लोगों का दिल जीत लिया. समय के साथ इडली तमिलनाडु, कर्नाटक और आसपास के इलाकों में नाश्ते की जान बन गई. हर जगह इसका अंदाज़ थोड़ा अलग रहा, कहीं मोटी इडली, कहीं मिनी इडली, तो कहीं रवा इडली. लेकिन इडली का प्यार हर जगह बराबर रहा.

आज की इडली: देसी दिल, विदेशी कहानी
आज इडली को हेल्दी फूड माना जाता है. कम तेल, आसान पाचन और भरपूर पोषण इसे खास बनाता है. शायद यही वजह है कि इडली अब सिर्फ साउथ इंडिया तक सीमित नहीं रही. देश-विदेश में इसकी धूम है.

इंडोनेशिया से शुरू होकर भारत में बस गई इडली आज यह सिखाती है कि खाना सरहदें नहीं जानता. थोड़ा सा विदेशी ट्विस्ट, ढेर सारा देसी प्यार और सदियों का सफर- यही है इडली की असली कहानी.

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