50 दिन में तैयार, 10 हजार की लागत में 70000 मुनाफा, मटर की ये खास किस्म किसानों को बना रही मालामाल
बाराबंकी: आज के दौर में किसान पारंपरिक फसलों की जगह सब्जियों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. वजह साफ है, कम समय में फसल तैयार होना और बाजार में अच्छा दाम मिलना. खासतौर पर सर्दियों के मौसम में बींस और हरी मटर जैसी सब्जियों की मांग काफी बढ़ जाती है. मंडियों में इन सब्जियों के अच्छे भाव मिलते हैं, जिससे किसानों को सीधा फायदा होता है. कम लागत, जल्दी पैदावार और बेहतर बाजार मूल्य के कारण ये फसलें किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं.
मटर और बींस की खेती के लिए मिट्टी?
हरी मटर और बींस की खेती के लिए बलुई दोमट और हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में इनकी पैदावार और भी बेहतर होती है. सही मिट्टी और समय पर सिंचाई से किसान कम मेहनत में अच्छी फसल ले सकते हैं.
बाराबंकी जनपद के देवा ब्लॉक क्षेत्र के बेरहरा गांव के किसान चमन मिश्रा ने अन्य फसलों के साथ हरी मटर और बींस की खेती शुरू की. उन्हें इसमें अच्छा फायदा मिला. वर्तमान में वह आधे एकड़ से ज्यादा जमीन पर हरी मटर और बींस की खेती कर रहे हैं. एक ही फसल से उन्हें करीब 70 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है.
किसान चमन मिश्रा बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक फसलों की खेती करते थे. उसमें मेहनत और खर्च ज्यादा लगता था, लेकिन मुनाफा खास नहीं हो पाता था. इसके बाद उन्होंने मौसमी सब्जियों की खेती शुरू की. इस समय उन्होंने एक बीघा में बींस और दो बीघा में हरी मटर की खेती की है. एक बीघा में लागत करीब 10 हजार रुपये के आसपास आती है, जबकि एक फसल से मुनाफा 70 हजार रुपये तक हो जाता है.
चाइनीज किस्म की मटर की खासियत
किसान बताते है कि हरी मटर की जो किस्म उनके खेत में उगाई जा रही है, वह चाइनीज किस्म है. यह अन्य किस्मों की तुलना में ज्यादा पैदावार देती है. इसकी फली बड़ी होती है और स्वाद में काफी मीठी होती है, जिस वजह से बाजार में इसकी मांग ज्यादा रहती है. वहीं बींस की डिमांड बड़े-बड़े होटल और रेस्टोरेंट में रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल जाता है.
कम लागत और ज्यादा मुनाफे की खेती
बींस और हरी मटर ऐसी सब्जियां हैं जिनमें लागत बहुत कम लगती है, जबकि मुनाफा काफी ज्यादा होता है. यही वजह है कि किसान अब इन फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
खेती की आसान विधि
बींस और मटर की खेती करना बेहद आसान है. सबसे पहले खेत की दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई की जाती है. इसके बाद गोबर की खाद और अन्य जरूरी खाद डालकर खेत को समतल किया जाता है. फिर बींस और मटर के बीजों की बुवाई की जाती है. पौधे निकलने के करीब दो सप्ताह बाद पहली सिंचाई की जाती है. लगभग 50 से 55 दिन में फसल तैयार होने लगती है और तोड़ाई शुरू हो जाती है.
कम समय में अच्छी कमाई करना चाहते किसानों के लिए हरी मटर और बींस की खेती एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है. सही जानकारी, सही तकनीक और बाजार की समझ से किसान अपनी आमदनी में बड़ा इजाफा कर सकते हैं.